Ayodhya :अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मुस्लिम पक्ष को अयोध्या जिले के धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन दी थी। इस जमीन पर एक नई मस्जिद बनाने के साथ-साथ अस्पताल, लाइब्रेरी, रिसर्च सेंटर, सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) और अन्य जनसेवा से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी इंडो–इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (आईआईसीएफ) को दी गई। फैसले को कई साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी इस जमीन पर मस्जिद का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतना समय बीतने के बाद भी काम आगे क्यों नहीं बढ़ पाया।

दरअसल, सबसे बड़ी वजह यह है कि इस प्रोजेक्ट को अभी तक सभी जरूरी सरकारी मंजूरियां नहीं मिल सकी हैं। किसी भी बड़े निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले संबंधित विभागों से अनुमति लेना जरूरी होता है। मस्जिद परियोजना के लिए भी ट्रस्ट ने अयोध्या विकास प्राधिकरण में नक्शा जमा कराया था, लेकिन जांच के दौरान कुछ तकनीकी कमियां सामने आईं। फायर सेफ्टी, सड़क की चौड़ाई, जल निकासी और अन्य जरूरी मानकों से जुड़ी मंजूरियां पूरी नहीं होने के कारण नक्शे को अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी। जब तक ये सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं होतीं, तब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता।

इसके बाद ट्रस्ट ने पुराने डिजाइन में बदलाव करने का फैसला लिया। शुरुआत में मस्जिद का डिजाइन काफी आधुनिक रखा गया था, जिसमें कांच और आधुनिक वास्तुकला का इस्तेमाल होना था। लेकिन बाद में निर्णय लिया गया कि मस्जिद का नया डिजाइन अवध की पारंपरिक शैली में तैयार किया जाए, ताकि यह स्थानीय संस्कृति और इतिहास के अनुरूप दिखाई दे। अब नया नक्शा तैयार किया जा रहा है, जिसे दोबारा मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। ट्रस्ट को उम्मीद है कि सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे होने के बाद इस बार मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

निर्माण में देरी की दूसरी बड़ी वजह आर्थिक संसाधनों की कमी भी मानी जा रही है। ट्रस्ट का कहना है कि इस परियोजना के लिए देश और विदेश से दान जुटाया जा रहा है, लेकिन अब तक जितनी धनराशि की जरूरत है, उतनी उपलब्ध नहीं हो सकी है। क्योंकि यह केवल मस्जिद का निर्माण नहीं है, बल्कि इसके साथ अस्पताल, लाइब्रेरी और अन्य सामाजिक संस्थानों का भी निर्माण होना है। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट के लिए करोड़ों रुपये की जरूरत पड़ेगी। पर्याप्त फंड उपलब्ध होने के बाद ही निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ सकेगा।

धन्नीपुर की जमीन के आसपास भी पिछले कुछ समय में कई बदलाव देखने को मिले हैं। इलाके में कुछ लोगों ने बिना अनुमति प्लॉटिंग और निर्माण शुरू कर दिया था। इसकी जानकारी मिलने पर अयोध्या विकास प्राधिकरण ने कार्रवाई करते हुए कई अवैध निर्माण हटाए। प्रशासन का कहना था कि सरकारी नियमों का पालन किए बिना किसी भी तरह का निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि मस्जिद के लिए आवंटित जमीन पूरी तरह सुरक्षित है और उस पर किसी तरह का विवाद नहीं है।

इस बीच ट्रस्ट ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि मस्जिद तक पहुंचने वाली सड़क को और चौड़ा किया जाए। ट्रस्ट का कहना है कि भविष्य में यहां बड़ी संख्या में लोग आएंगे, इसलिए बेहतर सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाएं पहले से तैयार होनी चाहिए। इसके अलावा बिजली, पानी और सीवर जैसी सुविधाओं को भी मजबूत करने की जरूरत बताई गई है, ताकि निर्माण पूरा होने के बाद लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक मस्जिद बनाना नहीं है। वे चाहते हैं कि यह जगह सामाजिक सेवा का एक बड़ा केंद्र बने, जहां धर्म के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंद लोगों की मदद से जुड़े काम भी किए जाएं। इसी सोच के तहत अस्पताल, लाइब्रेरी, रिसर्च सेंटर और सामुदायिक रसोई जैसी योजनाओं को भी इस परियोजना में शामिल किया गया है। उनका कहना है कि निर्माण शुरू होने के बाद सभी काम चरणबद्ध तरीके से पूरे किए जाएंगे।

फिलहाल धन्नीपुर की जमीन पर निर्माण कार्य शुरू होने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। ट्रस्ट का कहना है कि जैसे ही नया नक्शा मंजूर होगा, सभी विभागों से अनुमति मिल जाएगी और पर्याप्त धन उपलब्ध हो जाएगा, उसके बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। यानी वर्तमान स्थिति यह है कि जमीन पूरी तरह ट्रस्ट के पास है, परियोजना भी तैयार है, लेकिन सरकारी मंजूरियां, तकनीकी औपचारिकताएं और फंड की व्यवस्था पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही धन्नीपुर में मस्जिद और उससे जुड़े अन्य संस्थानों का निर्माण जमीन पर दिखाई देना शुरू होगा।


