Shamli: शामली जिले के काजीवाड़ा इलाके में रहने वाले आयुष मलिक इन दिनों काफी चर्चा में हैं। आयुष मलिक एक सफल दवा व्यापारी देवराज मलिक के बेटे हैं। परिवार अच्छी आर्थिक स्थिति वाला है और इलाके में उनकी अच्छी पहचान है। करीब बारह साल पहले आयुष मलिक ने अपनी पूरी मर्जी से इस्लाम धर्म अपना लिया था और अब वे खुद को मोहम्मद अली कहते हैं। यह फैसला किसी बाहरी दबाव या किसी व्यक्ति के प्रभाव में आकर नहीं लिया गया था। आयुष बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें इस्लाम की शिक्षाएं और उसकी सादगी बहुत अच्छी लगती थी। उन्होंने यूट्यूब पर पाकिस्तानी विद्वान डॉक्टर इसरार अहमद के व्याख्यान सुने और पढ़े। इन वीडियो से उन्हें इस्लाम की गहराई समझ में आई और उन्होंने खुद कलमा पढ़कर इस्लाम कबूल कर लिया।
उस समय आयुष फिजियोथेरेपी के लिए चांदनी नाम की महिला के संपर्क में आए थे लेकिन उन्होंने साफ कहा कि चांदनी ने कभी धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं किया। यह उनका अपना व्यक्तिगत और आध्यात्मिक फैसला था।धर्म परिवर्तन के बाद आयुष ने अपनी दिनचर्या भी बदल ली। वे नियमित नमाज पढ़ने लगे, दाढ़ी रखने लगे और इस्लामिक सुन्नतों का पालन करने लगे। दस्तावेजों में उनका नाम अभी भी आयुष मआयुशलिक ही दर्ज है लेकिन वे सामाजिक और धार्मिक जीवन में मोहम्मद अली के नाम से जाने जाते हैं। लगभग चार साल पहले आयुष ने चांदनी कुरैशी से दिल्ली में इस्लामिक रीति-रिवाज से निकाह कर लिया। चांदनी फिजियोथेरेपिस्ट और जिम ट्रेनर हैं। दोनों की शादी खुशी-खुशी हुई और वे पिछले कई सालों से साथ रह रहे थे। परिवार को इस शादी की पूरी जानकारी फरवरी महीने में हुई। आयुष कहते हैं कि चांदनी या उनके परिवार ने कभी संपत्ति या किसी अन्य मकसद से उन्हें प्रभावित करने की कोशिश नहीं की। दोनों एक-दूसरे की पसंद और सम्मान को बनाए रखते हुए सुखी जीवन बिता रहे थे।
हाल ही में ईद की नमाज के दौरान आयुष की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इन तस्वीरों को देखकर उनके परिवार में हड़कंप मच गया। पिता देवराज मलिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके बेटे को ब्रेनवॉश किया गया है, लव जिहाद का मामला है और संपत्ति हड़पने की साजिश रची जा रही है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के एंटी कन्वर्जन कानून के तहत चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया। कुछ मौलवियों पर भी केस दर्ज किया गया। इस घटना के बाद आयुष मलिक पर काफी दबाव बनाया जा रहा है कि वे हिंदू धर्म में वापस लौट आएं लेकिन आयुष अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग हैं। उन्होंने मीडिया के सामने खुलकर कहा कि वे अपनी मर्जी से मुसलमान बने हैं और चाहे कितना भी दबाव क्यों न पड़े, वे मुसलमान ही रहेंगे। आयुष ने यह भी कहा कि वे अपनी मां और बहनों को संपत्ति का अपना हिस्सा दे देने को तैयार हैं ताकि परिवार में कोई झगड़ा न रहे।यह पूरा मामला शामली जिले में समाज और धर्म के बीच संवेदनशील मुद्दा बन गया है। एक तरफ परिवार बेटे की वापसी और संपत्ति की सुरक्षा की चिंता जता रहा है तो दूसरी तरफ आयुष अपनी धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद की बात कर रहे हैं। आयुष बार-बार दोहराते हैं कि यह फैसला किसी लड़की या किसी संगठन के कहने पर नहीं लिया गया। उन्होंने बचपन से इस्लाम की किताबों और व्याख्यानों का अध्ययन किया था। वे कहते हैं कि इस्लाम उन्हें शांति और सही रास्ता दिखाता है।
पुलिस ने इस मामले में एसआईटी गठित कर जांच शुरू कर दी है। अभी जांच चल रही है और आगे क्या होता है यह देखना बाकी है। आयुष मलिक का यह मामला धर्म परिवर्तन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और परिवार के दबाव जैसे बड़े मुद्दों को फिर से उठा रहा है। उत्तर प्रदेश में एंटी कन्वर्जन कानून लागू होने के बाद ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां परिवार या समाज की शिकायत पर कार्रवाई होती है। आयुष जैसे युवा जो अपनी मर्जी से धर्म बदलते हैं उन्हें अक्सर समाज और परिवार दोनों तरफ से चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आयुष अब खुले मन से कह रहे हैं कि वे नमाज पढ़ेंगे, दाढ़ी रखेंगे और इस्लाम के अनुसार जीवन जीएंगे। उन्होंने किसी भी तरह की हिंसा या झगड़े से दूर रहने की अपील भी की है। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ लोग आयुष के फैसले का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ लोग परिवार के साथ खड़े हैं।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस मामले का सही निष्कर्ष सामने आएगा। फिलहाल आयुष मलिक अपनी पसंद पर टिके हुए हैं और शांति से अपना जीवन जीने की बात कर रहे हैं। समाज को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए ताकि किसी की व्यक्तिगत आजादी पर अनुचित दबाव न बने और कानून का भी पूरा सम्मान हो।


