Monday, July 27, 2026
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जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर कार्रवाई का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, 28 जुलाई को सुनवाई

रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई को कानूनी चुनौती, छात्रों ने पढ़ाई प्रभावित न होने की मांग की

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

रामपुर: रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी 38 भवनों पर कार्रवाई को लेकर विवाद के बीच मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है।उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद लगातार जारी है। यूनिवर्सिटी परिसर के 38 भवनों से जुड़ी ध्वस्तीकरण कार्रवाई के मामले में कानूनी चुनौती सामने आई है और मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने मामले में रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित है। इसलिए फिलहाल मामले को न्यायिक प्रक्रिया के अधीन माना जा रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक, रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई में यूनिवर्सिटी की 40 इमारतों में से 38 को कथित तौर पर आवश्यक निर्माण स्वीकृति से जुड़ी अनियमितताओं के आधार पर कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। इस कार्रवाई के विरोध में यूनिवर्सिटी के छात्र और समर्थक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि किसी भी कार्रवाई का असर उनकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की क्या मांग है?

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग है कि यूनिवर्सिटी के भवनों को गिराने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को मामले का समाधान बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए करना चाहिए।

छात्रों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि भवनों से जुड़े विवाद का असर विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों पर नहीं पड़ना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का जोर इस बात पर है कि शिक्षा व्यवस्था बाधित न हो और छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिले।

राजनीतिक दलों ने भी उठाई कार्रवाई रोकने की मांग

जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में समाजवादी पार्टी के नेताओं की ओर से भी विरोध दर्ज कराया गया है। पार्टी के नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों ने कार्रवाई रोकने की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपे हैं। उनका कहना है कि भवनों से जुड़ा कोई भी विवाद कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए तथा छात्रों की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

वहीं, यूनिवर्सिटी से जुड़े भवनों की वैधता और निर्माण अनुमति को लेकर प्रशासनिक पक्ष और विरोध कर रहे पक्षों के बीच मतभेद हैं। ऐसे में अंतिम स्थिति अदालत और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आगे के फैसलों से स्पष्ट होगी।

28 जुलाई की सुनवाई पर नजर

फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े 38 भवनों का मामला अदालत में विचाराधीन है। हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई को इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत की कार्यवाही के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आगे प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में बढ़ेगी।

Global Boundary की अपील: इस मामले में अंतिम निर्णय आने तक पाठकों को सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों और दावों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक प्रशासनिक और न्यायिक जानकारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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