नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान एक साधारण से दिखने वाले शख्स का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो के बाद लोग यह जानने में जुट गए कि आखिर यह व्यक्ति कौन है, जो बिना किसी बड़े राजनीतिक पद या पहचान के संविधान, लोकतंत्र, मजदूरों और गरीबों के मुद्दों पर इतनी बेबाकी से अपनी बात रख रहा है। यह शख्स हैं मोहम्मद इरफान, जो दिल्ली की सावदा JJ Colony में रहते हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मोहम्मद इरफान रोजमर्रा की मेहनत करके अपना जीवन चलाते हैं और हॉकर के तौर पर काम करते हैं। जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अपने विचारों को जिस सहज अंदाज में सामने रखा, उसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया। देखते ही देखते उनका वीडियो वायरल हो गया और इसके बाद कई लोग उनसे मिलने और उनकी कहानी जानने में दिलचस्पी लेने लगे।

जंतर–मंतर से मिली नई पहचान
मोहम्मद इरफान जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन में शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया और लोकतंत्र तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
उनकी बातचीत में सबसे ज्यादा जोर मजदूरों और गरीब तबके की परेशानियों पर दिखाई दिया। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि दिहाड़ी पर काम करने वाले लोगों के लिए रोज की कमाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। अगर कोई मजदूर एक दिन काम पर नहीं जाता, तो उसके परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
इरफान का कहना था कि समाज में मजदूरों और गरीबों की समस्याओं पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और मजदूरों के अधिकारों जैसे मुद्दों को आम लोगों के जीवन से जोड़कर देखा।
उनकी बातें किसी लिखी हुई राजनीतिक स्क्रिप्ट की तरह नहीं थीं। वह अपने अनुभवों और अपनी समझ के आधार पर बात कर रहे थे। शायद यही सादगी लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर गई।

औपचारिक शिक्षा सीमित, लेकिन सीखने की इच्छा कायम
मोहम्मद इरफान की कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू उनकी शिक्षा से जुड़ा है।
मीडिया रिपोर्टों में उनके हवाले से बताया गया है कि उन्हें नियमित स्कूली शिक्षा का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उन्होंने अपनी पढ़ाई को लेकर भी सार्वजनिक बातचीत में जानकारी दी है।
लेकिन स्कूल की पढ़ाई पूरी न कर पाने के बावजूद उन्होंने सीखने की इच्छा को खत्म नहीं होने दिया। इरफान के अनुसार, वह स्मार्टफोन और इंटरनेट की मदद से देश-दुनिया की घटनाओं और संविधान जैसे विषयों को समझने की कोशिश करते हैं।
वह Google Voice Search और YouTube जैसे माध्यमों का इस्तेमाल करके जानकारी हासिल करते हैं। यही वजह है कि उनकी कहानी को कई लोग आत्मशिक्षा और सीखने की इच्छा के उदाहरण के रूप में भी देख रहे हैं।
उनकी जिंदगी यह सवाल भी सामने रखती है कि शिक्षा केवल स्कूल और कॉलेज की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। अगर किसी व्यक्ति में सीखने की इच्छा हो, तो वह उपलब्ध संसाधनों के जरिए अपने ज्ञान को बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।

मजदूरों की आवाज को अपनी आवाज मानते हैं इरफान
जंतर-मंतर पर अपनी बातचीत के दौरान इरफान ने मजदूरों की आर्थिक स्थिति और उनकी रोजमर्रा की परेशानियों का जिक्र किया।
उनका कहना था कि दिहाड़ी मजदूर और छोटे कामगार अक्सर अपनी रोज की कमाई पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में उनके लिए किसी प्रदर्शन या आंदोलन में शामिल होना आसान नहीं होता, क्योंकि काम छूटने का मतलब कमाई का नुकसान हो सकता है।
इरफान ने मजदूरों के काम के घंटे, आय और महंगाई जैसे सवालों पर भी अपनी बात रखी। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए व्यक्तिगत आंकड़ों को आधिकारिक सरकारी आंकड़े नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि उनके अपने अनुभव और बयान के तौर पर देखा जाना चाहिए।
उनकी बातों का मुख्य संदेश यह था कि देश की तरक्की की चर्चा में उन लोगों की समस्याओं को भी जगह मिलनी चाहिए, जो रोज मेहनत करके अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं।

संविधान और लोकतंत्र को लेकर चर्चा
वायरल वीडियो में मोहम्मद इरफान ने संविधान और लोकतंत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने लोकतंत्र में संवाद और जनता की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
उनकी सोच में लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। वह इसे आम नागरिक के अधिकार, सम्मान और अपनी बात रखने की आजादी से जोड़कर देखते हैं।
उनका मानना है कि जनता और सरकार के बीच संवाद होना जरूरी है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों की समस्याओं को सुना जाना चाहिए और असहमति को बातचीत के जरिए समझने की कोशिश होनी चाहिए।
उनकी यह बात इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि वह किसी बड़े राजनीतिक मंच से नहीं, बल्कि एक आम नागरिक के रूप में अपनी बात रख रहे थे।

सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुए?
मोहम्मद इरफान के वायरल होने के पीछे उनकी सादगी और बोलने का सहज अंदाज बड़ी वजह माना जा रहा है।
उन्होंने कैमरे के सामने अपने जीवन और आसपास के लोगों की समस्याओं के बारे में बात की। उनकी बातचीत में मजदूरों की परेशानी, गरीब परिवारों की चिंता, शिक्षा की जरूरत और संविधान तथा लोकतंत्र की चर्चा शामिल थी।
सोशल मीडिया पर वीडियो फैलने के बाद अलग-अलग वर्गों के लोगों ने उनकी कहानी पर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने उनकी संविधान और लोकतंत्र को लेकर समझ की सराहना की, तो कुछ ने उनकी कहानी को औपचारिक शिक्षा और आत्मशिक्षा के बीच एक उदाहरण के रूप में देखा।
इस तरह सावदा JJ Colony में सामान्य जीवन जीने वाले एक व्यक्ति की पहचान अचानक सोशल मीडिया के जरिए देश के बड़े हिस्से तक पहुंच गई।

राहुल गांधी ने भी की मुलाकात
मोहम्मद इरफान के वायरल होने के बाद उनकी चर्चा राजनीतिक हलकों तक भी पहुंची।
27 जुलाई 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मोहम्मद इरफान से मुलाकात की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान इरफान ने मजदूरों, गरीबों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बातें रखीं।
राहुल गांधी ने भी इरफान की संविधान को लेकर समझ और सीखने की इच्छा की सराहना की। इस मुलाकात के बाद इरफान की कहानी को और ज्यादा लोगों ने जाना।
कुछ ही समय पहले तक जो व्यक्ति अपने इलाके से बाहर बहुत कम लोगों के लिए परिचित था, वह अब सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन चुका था।

साधारण जीवन से राष्ट्रीय चर्चा तक
मोहम्मद इरफान की कहानी को केवल एक वायरल वीडियो के रूप में देखना उनकी पूरी कहानी को समझना नहीं होगा।
उनकी जिंदगी उस आम भारतीय नागरिक की कहानी है, जिसे औपचारिक शिक्षा का पर्याप्त अवसर नहीं मिला, लेकिन जिसने सीखने की इच्छा को खत्म नहीं होने दिया। उन्होंने इंटरनेट और स्मार्टफोन को जानकारी हासिल करने का माध्यम बनाया और अपने आसपास के मजदूरों तथा गरीब लोगों की समस्याओं को समझने की कोशिश की।
उनकी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनकी प्रसिद्धि नहीं, बल्कि वे सवाल हैं जिन्हें उन्होंने सार्वजनिक चर्चा के सामने रखा।
मजदूरों की आर्थिक सुरक्षा, गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और महंगाई जैसे मुद्दे आज भी समाज के सामने महत्वपूर्ण सवाल हैं।
मोहम्मद इरफान ने इन मुद्दों को किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि अपने जीवन के अनुभवों से सामने रखा। यही वजह है कि उनकी आवाज लोगों तक पहुंची।

आज वह सोशल मीडिया पर वायरल हैं और बड़े राजनीतिक नेताओं से उनकी मुलाकात हो रही है। लेकिन उनकी कहानी का असली महत्व शायद इस बात में है कि एक साधारण व्यक्ति को जब अपनी बात रखने का अवसर मिला, तो उसने अपनी व्यक्तिगत प्रसिद्धि से ज्यादा मजदूरों और गरीबों के सवालों को सामने रखना जरूरी समझा।
मोहम्मद इरफान की कहानी हमें यह याद दिलाती है कि समाज में बदलाव की चर्चा केवल बड़े मंचों और बड़े नामों तक सीमित नहीं होती। कभी-कभी किसी सामान्य व्यक्ति की सरल और अनुभव से निकली बात भी हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच सकती है।
जंतर-मंतर से शुरू हुई उनकी पहचान अब राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन चुकी है। आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी आवाज के साथ उठाए गए मजदूरों, गरीबों और शिक्षा से जुड़े सवालों पर सार्वजनिक बहस कितनी आगे बढ़ती है।


