Friday, July 3, 2026
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देश भर में टिर्री रोको अभियान .

देश के कई शहरों में ई-रिक्शा की बैटरियों को मोबाइल ऐप के जरिए बीच रास्ते में बंद किए जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे ड्राइवरों की रोजी-रोटी और यात्रियों की सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। सरकार, पुलिस और ई-रिक्शा कंपनियों पर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है।

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

 Lucknow:देश के कई शहरों में बैटरी चलित ई-रिक्शा को लेकर लगातार हंगामा बढ़ रहा है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कुछ नौजवान लड़के मोबाइल ऐप के जरिए बीच रास्ते में रिक्शा बंद कर देते हैं। इससे ड्राइवर और यात्री दोनों परेशान हो रहे हैं। यह घटनाएं दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, कानपुर, पटना और अन्य शहरों में आम होती जा रही हैं।कंपनियां बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) ऐप का इस्तेमाल करती हैं। इस ऐप से बैटरी को रिमोट कंट्रोल किया जा सकता है। अगर ड्राइवर किराए का कुछ हिस्सा समय पर जमा नहीं करता या कोई छोटी गलती हो जाती है तो बैटरी बंद हो जाती है। अब कुछ शरारती नौजवान लड़के भी इस ऐप का गलत फायदा उठा रहे हैं। वे जानबूझकर रिक्शा रोककर ड्राइवर को परेशान करते हैं। कुछ वीडियो में दिख रहा है कि लड़के हंसते-हंसते रिक्शा बंद कर देते हैं और ड्राइवर से बहस करते हैं। ड्राइवर गुस्से में आ जाता है और यात्री बीच में फंस जाते हैं।इससे ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है।

कई ड्राइवर बताते हैं कि वे सुबह से शाम तक मेहनत करते हैं। बीच रास्ते में रिक्शा बंद होने से उनका पूरा दिन खराब हो जाता है। यात्री पैदल उतरकर जाते हैं और कभी-कभी ड्राइवर को गाली-गलौज भी सहनी पड़ती है। खासकर रात के समय या बारिश में यह समस्या और खतरनाक हो जाती है। महिलाएं और बच्चे इससे सबसे ज्यादा परेशान हैं।सरकार और पुलिस की ओर से अब तक कुछ कार्रवाई शुरू हुई है। कई शहरों में ट्रैफिक पुलिस ने ई-रिक्शा कंपनियों को नोटिस भेजा है। कुछ जगहों पर अवैध रूप से रिक्शा चलाने वालों पर जुर्माना भी लगाया गया है। लेकिन मोबाइल ऐप से जानबूझकर रिक्शा बंद करने वाले नौजवानों पर अभी सख्त कार्रवाई की खबर कम है। पुलिस कह रही है कि ऐसे मामलों की शिकायत पर जांच की जा रही है। कुछ राज्यों में कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐप की सुरक्षा बढ़ाएं ताकि कोई बाहर का व्यक्ति बैटरी बंद न कर सके।ड्राइवर यूनियन इस मुद्दे को लेकर आवाज उठा रही है। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार बैटरी रिमोट किल स्विच पर पूरी तरह रोक लगाए। साथ ही कंपनियों को ड्राइवरों के साथ नरमी बरतने को कहा जाए।

 

विशेषज्ञ कहते हैं कि ई-रिक्शा पर्यावरण के लिए अच्छा विकल्प है लेकिन इसका प्रबंधन ठीक नहीं होने से समस्या बढ़ रही है। कंपनियां भारी ब्याज पर रिक्शा देती हैं और छोटी गलती पर सजा देती हैं।आम लोग अब सावधानी बरत रहे हैं। वे ई-रिक्शा लेने से पहले ड्राइवर से पूछते हैं कि बैटरी ठीक है या नहीं। कुछ जगहों पर लोग ऑटो या बस जैसी पुरानी सवारी चुन रहे हैं। यह हंगामा युवाओं की बेरोजगारी से भी जुड़ा है। कई नौजवान ई-रिक्शा चलाते हैं लेकिन परेशानी के कारण वे भी हताश हो रहे हैं।सरकार को जल्द ही इस समस्या का स्थायी हल निकालना चाहिए। ऐप पर सख्त नियम, ड्राइवरों को सुरक्षा और यात्री सुविधा पर ध्यान देना जरूरी है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह हंगामा और बढ़ सकता है। फिलहाल ड्राइवर और यात्री दोनों इस नई समस्या से जूझ रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही शांति बनी रहेगी और ई-रिक्शा सही तरीके से चल सकेंगे।

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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