Saturday, July 11, 2026
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सिद्धार्थनगर का काला नमक चावल बना किसानों की नई पहचान, देश-विदेश में बढ़ी मांग

प्राकृतिक खुशबू, बेहतरीन गुणवत्ता और GI टैग के दम पर देश-विदेश में बढ़ रही काला नमक चावल की पहचान

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

UP:उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर जिला आज अपनी समृद्ध कृषि परंपरा और काला नमक चावल के लिए देशभर में नई पहचान बना रहा है। कभी सीमित क्षेत्र में उगाई जाने वाली यह पारंपरिक धान की किस्म अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच चुकी है। सरकार की विभिन्न योजनाओं, बेहतर ब्रांडिंग और किसानों की मेहनत ने इस विशेष चावल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। हाल के वर्षों में इसकी खेती का दायरा लगातार बढ़ा है, जिससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है।

काला नमक चावल अपनी अलग सुगंध, स्वाद और पोषण गुणों के कारण सामान्य चावल से अलग माना जाता है। यह पारंपरिक सुगंधित धान की किस्म है, जिसका दाना और भूसी विशेष पहचान रखते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इसमें आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व सामान्य चावल की तुलना में अधिक पाए जाते हैं। इसी वजह से स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

सिद्धार्थनगर में काला नमक चावल को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। किसानों को बेहतर बीज, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे खेती का रकबा बढ़ा है और उत्पाद की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। सरकार का उद्देश्य इस पारंपरिक धान को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान दिलाना है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि काला नमक चावल का संबंध भगवान बुद्ध से भी जोड़ा जाता है। पूर्वांचल क्षेत्र में इसे लंबे समय से उगाया जाता रहा है और इसकी ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक पहचान भी काफी मजबूत है। इसी विशेषता के कारण इसे भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त है, जिससे इसकी मौलिकता और गुणवत्ता को कानूनी संरक्षण मिला है।

कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों के बीच सिद्धार्थनगर आज एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभर रहा है। स्थानीय किसानों का मानना है कि यदि निर्यात, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग को इसी तरह बढ़ावा मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में काला नमक चावल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि जिले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी मिलेगी।

काला नमक चावल की सफलता यह साबित करती है कि यदि पारंपरिक कृषि उत्पादों को आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन और सरकारी सहयोग मिले तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकते हैं। सिद्धार्थनगर की यह कहानी आज पूरे उत्तर प्रदेश के लिए प्रेरणा का विषय बन चुकी है।

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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