नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), छात्र संगठनों और विपक्षी दलों से जुड़े लोगों का विरोध तेज हो गया है। मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदर्शनकारी सवाल उठा रहे हैं। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और कई लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है।

कौन हैं ज्ञानेश कुमार? ज्ञानेश कुमार भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। उन्होंने 19 फरवरी 2025 को देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पद संभाला था। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को निर्धारित नियमों के अनुसार कराना है। मतदाता सूची तैयार करना और उसमें नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया की निगरानी करना भी आयोग के काम का हिस्सा है।

क्यों हो रही है इस्तीफे की मांग?ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध का मुख्य कारण मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया है। चुनाव आयोग की ओर से कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाताओं के नाम और उनके विवरण की जांच की जा रही है।CJP और कुछ विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इससे योग्य मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि मतदाता सूची में हुए बदलावों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी दे।हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटने के सभी मामले गलत तरीके से नाम हटाने के नहीं होते। इनमें मृत मतदाताओं, दूसरी जगह जा चुके लोगों और सत्यापन में नहीं मिल पाए लोगों के नाम भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए यह जांचना जरूरी है कि कहीं किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से तो नहीं हटाया गया।रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूची में बदलाव को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध हुआ है। चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनावी प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

CJP ने क्या मांग रखी है?कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े नेता अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य सदस्य ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। संगठन का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।CJP ने मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही की मांग की है। संगठन का कहना है कि जब तक उसकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे की मांग तक सीमित नहीं है। इसके साथ मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग पर जनता के भरोसे से जुड़े सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की खबरें सामने आई हैं। 10 अक्टूबर को CJP के नेतृत्व में प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उस दिन दिल्ली में 2,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर थी।इसके बाद 13 अक्टूबर को भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान CJP से जुड़े कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड पार करके प्रदर्शन स्थल की ओर पहुंचे थे। इस घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सवाल उठे।CJP से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से रखने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है। किसी भी मामले में हिरासत या गिरफ्तारी अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करती।

विपक्षी दलों ने भी उठाए सवाल :मतदाता सूची विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने भी चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन NSUI ने 13 अक्टूबर को दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।आम आदमी पार्टी (AAP) की दिल्ली इकाई ने भी 15 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी के नेताओं ने कहा है कि वे मतदाता सूची से जुड़े विवाद पर विरोध जारी रखेंगे। इन प्रदर्शनों से साफ है कि चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची में बदलाव का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।हालांकि, अलग-अलग दलों की मांगों और आरोपों में अंतर हो सकता है। इसलिए सभी बयानों को संबंधित नेताओं और संगठनों के नाम के साथ ही देखा जाना चाहिए।

क्या ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा दे दिया है?14 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की पुष्टि नहीं हुई है। उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है, लेकिन मांग और इस्तीफा दो अलग-अलग बातें हैं।अब सबकी नजर चुनाव आयोग के जवाब, मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों के समाधान और विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर है। इस पूरे विवाद का निष्कर्ष जांच, आधिकारिक जानकारी और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर ही निकाला जा सकता है।



