लखनऊ के कैफ़ी आज़मी अकादमी में 26 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को APCR की तरफ से SIR और चुनाव आयोग की कार्य शैली को लेकर एक समीक्षा प्रोग्राम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने SIR से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में करीब साढ़े तीन करोड़ वोट काटे गए, लेकिन ये किस आधार पर काटे गए? योगेंद्र यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक राज्य में 18 साल से ज़्यादा उम्र के नागरिकों की संख्या 16 करोड़ 11 लाख है। SIR शुरू होने से पहले 15 करोड़ 44 लाख वोटर कम थे। लेकिन SIR के बाद ये घटकर 13 करोड़ रह गए हैं। ऐसे में ये साढ़े तीन करोड़ वोटर कहां गए?

उन्होंने एसआईआर के खिलाफ आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि आज के लोकतंत्र में लोक और तंत्र के बीच संघर्ष हावी होने लगा है। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली और देश के अलग-अलग जगहों पर जो आंदोलन चल रहा है, वो भारत के संविधान को बनाए रखने के लिए किया जा रहा है। योगेंद्र यादव का कहना है कि इस आंदोलन का मकसद भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है। ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त किया जाना चाहिए। और केंद्र सरकार ने साल 2023 में जो कानून बनाया था कि सरकार जिसे चाहे चुनाव आयुक्त नियुक्त कर सकती है, ऐसे कानून को वापस लिया जाना चाहिए और सर इसे वापस लिया जाना चाहिए। इन सभी मांगों को लेकर देश के लोग सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन कर रहे हैं।

इस मौके पर APCR के महासचिव नदीम खान ने आंकड़ों के जरिए यह समझाने की कोशिश की कि बीजेपी की सरकार चुनाव आयोग द्वारा चुनाव मैनेज करके बनाई गई है और आगे भी इसी तरह से सरकार बनाने की कोशिश की जा रही है. और ये है बैसाखी वाली सरकार. और इस बैसाखी में सबसे बड़ा सहारा न्यायपालिका दे रही है. उन्होंने कई उदाहरण देकर यह समझाने की कोशिश की कि न्यायपालिका किस तरह सरकार की मदद करती है.

नदीम खान ने कहा कि 2024 के चुनाव से पहले मोदी सरकार को यह एहसास हो गया था कि हम पॉपुलर मैंडेट से खिलवाड़ करके भी 2024 के बाद चुनाव नहीं जीत सकते, इसलिए उन्होंने SIR प्रोसेस शुरू किया। और उन्होंने अपने हिसाब से बड़ी संख्या में वोटर्स को काट छांट कर चुनाव जीतने की कोशिश की है। उन्होंने इस मंच से AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी पर भी हमला बोला, ओवैसी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह कहते हैं कि SIR हमारे लिए मायने नहीं रखता। जवाब में नदीम खान ने हैदराबाद की तीन विधानसभा सीटों का उदाहरण देकर यह समझाने की कोशिश की कि वहां जानबूझकर बड़ी संख्या में वोट काटे गए हैं। ऐसे में ओवैसी के लिए SIR क्यों मायने नहीं रखता। यह समझ से परे है।

APCR का ये प्रोग्राम लखनऊ यूनिवर्सिटी की पूर्व VC प्रोफ़ेसर रूप रेखा वर्मा की अध्यक्षता में हुआ, जिसमे शहर के सैकड़ों की संख्या में पढ़े लिखे बुद्धिजीवि मौजूद रहे.


