लखनऊ। नकली दवाएं यूपी में बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसी अभियान के तहत एफएसडीए ने 3.63 करोड़ रुपये की संदिग्ध दवाएं जब्त की हैं।उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने व्यापक अभियान चलाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की अलग-अलग टीमों ने कई स्थानों पर छापेमारी कर करीब 3.63 करोड़ रुपये मूल्य की संदिग्ध और अवैध दवाएं जब्त की हैं। इस कार्रवाई को प्रदेश में नकली दवाओं के खिलाफ हाल के वर्षों की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में अब तक 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के दौरान कई मेडिकल स्टोर, गोदाम और दवा वितरण केंद्रों की जांच की गई, जहां बड़ी मात्रा में ऐसी दवाएं मिलीं जिनकी गुणवत्ता और वैधता पर संदेह है। कई दवाओं के नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं ताकि उनकी गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच की जा सके।
जांच एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती पड़ताल में एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जो नकली या संदिग्ध दवाओं को बाजार तक पहुंचाने का काम कर रहा था। इस नेटवर्क के अन्य राज्यों से भी जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

एफएसडीए अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान कई प्रतिष्ठानों के रिकॉर्ड की जांच की गई। जहां नियमों का उल्लंघन पाया गया, वहां कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लाइसेंसों को निलंबित या निरस्त करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली दवाएं मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। ऐसी दवाओं के सेवन से बीमारी बढ़ने, इलाज प्रभावित होने और कई मामलों में जान का जोखिम भी पैदा हो सकता है। इसलिए दवाएं हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदनी चाहिए और खरीदते समय बिल लेना भी जरूरी है।

प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी मेडिकल स्टोर या दवा के संबंध में कोई संदेह हो तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें। विभाग का कहना है कि नकली दवाओं के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

प्रदेश सरकार का कहना है कि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से भविष्य में भी ऐसे विशेष अभियान चलाए जाएंगे, ताकि नकली दवाओं के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।


