Thursday, August 27, 2026
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भिखारिन की मौत के बाद घर से निकली पैसों की बोरियां

कर्नाटक के मांड्या जिले में बुजुर्ग महिला की मौत के बाद छोटे से कमरे से लाखों रुपये और सिक्कों की बचत मिली, सोशल मीडिया पर वायरल हुई घटना की पूरी सच्चाई।

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

Karnataka:  कर्नाटक से सामने आई एक सच्ची घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक बुजुर्ग महिला, जो वर्षों से भीख मांगकर अपना जीवन चला रही थीं, उनकी मौत के बाद जब उनके घर का दरवाजा खोला गया तो अंदर का नज़ारा देखकर लोग हैरान रह गए। छोटे से कमरे में नोटों और सिक्कों से भरी कई बोरियां रखी मिलीं। किसी ने भी कल्पना नहीं की थी कि इतनी सादगी से जीवन बिताने वाली महिला ने वर्षों में इतनी बड़ी बचत कर रखी होगी।


मृत महिला की पहचान हूर उन्निसा के रूप में हुई है। वह लंबे समय से कर्नाटक के मांड्या जिले में भीख मांगकर अपना गुजारा करती थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार वह रोज सुबह घर से निकलतीं, मंदिरों मस्जिदों और बाजारों के आसपास भीख मांगतीं और शाम को अपने कमरे में लौट आती थीं। उनका रहन-सहन इतना साधारण था कि आसपास रहने वाले लोगों को भी उनकी जमा-पूंजी का कोई अंदाजा नहीं था।


महिला की मौत के बाद पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस घर पहुंची और कमरे की तलाशी ली गई, तब वहां कई बोरियों में छोटे-छोटे नोट और बड़ी मात्रा में सिक्के मिले। अधिकतर नोट 10, 20 और 50 रुपये के थे। कमरे में रखी हर बोरी को बाहर निकालकर गिनती शुरू की गई। काफी देर तक नोट और सिक्के अलग-अलग किए जाते रहे।


प्रशासन की शुरुआती गिनती में लाखों रुपये नकद मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पूरी रकम को सुरक्षित रखकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि महिला की संपत्ति और उसके कानूनी वारिसों की पहचान की जा रही है, ताकि नियमों के अनुसार आगे कार्रवाई की जा सके।
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें फैलने लगीं। कहीं करोड़ों रुपये मिलने का दावा किया गया तो कहीं दर्जनों बोरियां मिलने की बात कही गई। लेकिन आधिकारिक जानकारी के अनुसार घर से नकद राशि और सिक्कों की बड़ी मात्रा जरूर मिली, जबकि बढ़ा-चढ़ाकर किए जा रहे कई दावों की पुष्टि नहीं हुई है।


यह घटना केवल हैरानी वाली खबर नहीं है, बल्कि एक बड़ा सामाजिक संदेश भी देती है। हूर उन्निसा ने अपनी छोटी-छोटी कमाई को वर्षों तक संभालकर रखा। उन्होंने बेहद सादा जीवन जिया और अपनी जरूरतों को सीमित रखा।

उनकी कहानी यह दिखाती है कि लगातार की गई छोटी बचत समय के साथ बड़ी रकम में बदल सकती है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और बरामद रकम को कानूनी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा गया है। स्थानीय लोगों के बीच यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है और हर कोई इस बात पर आश्चर्य जता रहा है कि एक भिखारिन के घर से इतनी बड़ी बचत निकल सकती है।

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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