Wednesday, September 2, 2026
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जेल में दो कैदियों की शादी

मंडोर ओपन जेल में दो उम्रकैद कैदियों ने रचाई शादी, राजस्थान हाईकोर्ट ने दी थी अनुमति

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.
Rajasthan: राजस्थान की जोधपुर मंडोर ओपन जेल में जुलाई 2026 में एक अनोखी और सच्ची घटना घटी। दो उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों ने शादी का बंधन बाँध लिया। यह शादी जेल के अंदर ही हुई। दोनों की मुलाकात खुली जेल में हुई थी और बाद में राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति से विवाह संपन्न हुआ।वर का नाम मूलाराम है। वे नागौर जिले के रहने वाले हैं। उन्हें हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा मिली थी। अच्छा व्यवहार होने के कारण उन्हें कुछ साल पहले अजमेर जेल से मंडोर ओपन एयर कैंप में भेजा गया।वधू का नाम सीमा घड़से है। वे भी उम्रकैद की सजा काट रही हैं। उन्हें अपने पति की हत्या के मामले में सजा हुई थी। अच्छा आचरण के कारण उन्हें भी महिला जेल से मंडोर ओपन जेल में शिफ्ट किया गया।
ओपन जेल में कैदियों को कुछ स्वतंत्रता मिलती है। वे खेतों में काम करते हैं और एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं। इसी दौरान मूलाराम और सीमा की मुलाकात हुई। दोनों ने एक-दूसरे को समझा और धीरे-धीरे उनके बीच प्यार पनप गया। उन्होंने फैसला किया कि वे शादी करना चाहते हैं। लेकिन दोनों कैदी थे, इसलिए सामान्य तरीके से शादी संभव नहीं थी। मूलाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट में अर्जी लगाई।हाईकोर्ट के जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की बेंच ने इस मामले को सुना। कोर्ट ने कहा कि दो बालिग व्यक्ति की सहमति से शादी करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। कैदी होने के बावजूद यह अधिकार खत्म नहीं होता। कोर्ट ने जेल प्रशासन को अनुमति दी कि मंडोर ओपन जेल के अंदर शादी हो सकती है। अधिकतम 21 लोग परिवार के सदस्यों और पंडित सहित शामिल हो सकते हैं।
खर्च मूलाराम खुद वहन करेंगे।22 जुलाई 2026 को शादी का दिन आया। जेल परिसर में सादा लेकिन पारंपरिक मंडप सजाया गया। मूलाराम दूल्हे के रूप में तैयार हुए और सीमा दुल्हन के रूप में। दोनों ने माला पहनाई और सात फेरे लिए। जेल अधिकारी, पुलिस कर्मचारी और कुछ परिवार के सदस्य मौजूद रहे।
समारोह के बाद मिठाई बाँटी गई। सबने जोड़े को आशीर्वाद दिया।यह घटना राजस्थान की खुली जेल व्यवस्था की खासियत दिखाती है। यहाँ अच्छे व्यवहार वाले कैदियों को सुधार का मौका मिलता है। वे सामान्य जीवन के करीब रहकर नई शुरुआत कर सकते हैं। मूलाराम और सीमा की यह शादी सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि यह दिखाती है कि कानून कैदियों के मौलिक अधिकारों का भी सम्मान करता है। दोनों अब पति-पत्नी के रूप में जेल में ही एक साथ रह सकते हैं। उनकी कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है कि जीवन में सुधार और नई शुरुआत हमेशा संभव है।

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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