Saturday, March 7, 2026
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भारतीय क्रिकेटर संजय बांगर के बेटे ने कराया जेंडर चेंज

अनाया ने बताया कि आर्यन से अनाया बनने तक का सफर आसान नहीं था. यह एक बहुत कठिन और चुनौतीपूर्ण यात्रा रही, जिसमें कई मानसिक और शारीरिक बदलाव आए.

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

Sport: खेल की दुनिया में अक्सर हमें कई तरह की खबरे सुनने को मिलती हैं, लेकिन इस बार एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसको जान कर काफी लोग हैरान रह गये. दरअसल, भारतीय क्रिकेटर संजय बांगर के बेटे ने अपना जेंडर चेंज करवा लिया है और अब वह एक लड़की के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं. 23 वर्षीय के क्रिकेटर आर्यन को अब अनाया बांगर के नाम से जाना जाता है. यह खबर सोशियल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है.

पूर्व क्रिकेटर संजय बांगर के बेटे आर्यन बांगर भी एक क्रिकेटर थे. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस जेंडर चेंज के बारे में खुलकर बात की है. अनाया ने बताया कि आर्यन से अनाया बनने तक का सफर आसान नहीं था. यह एक बहुत कठिन और चुनौतीपूर्ण यात्रा रही, जिसमें कई मानसिक और शारीरिक बदलाव आए. और यह भी बताया कि इस प्रक्रिया में उन्होंने पहले हॉरमोनल रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) शुरू की, और इसके बाद सेक्स चेंज सर्जरी करवाई. यह सफर 11 महीने पहले शुरू हुआ था, और अब वह एक महिला के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं.

हमारे समाज में लोगों की सोच लिंग पहचान के बारे में अलग होती है, और ऐसे में किसी व्यक्ति का जेंडर चेंज कराना आसन नहीं होता. इस यात्रा के दौरान अनाया ने कहा उन्हें बहुत सारी सामाजिक बाधाओं का सामना करना पड़ा. समाज के लोगों की सोच और उनकी आलोचनाओं को झेलना, खुद को समझना और फिर खुद को उस रूप में स्वीकार करना एक बहुत ही मुश्किल कदम था. लेकिन फिर भी हार मानने के बजाय उन्होंने खुद को मज़बूती से उठाया. अनाया के जेंडर चेंज करने की यात्रा में उनकी फैमिली ने भी उनका साथ दिया. उनके पिता पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगर ने हमेशा उनका समर्थन किया है, और कहा कि मे हमेशा अपनी बेटी के साथ हूँ.

अनाया ने अपने इंस्टाग्राम की एक पोस्ट के ज़रिए यह भी बताया की क्रिकेट उनका बहुत बड़ा सपना था. हालांकि यह सपना पूरा करना भी आसान नहीं था काफी कठिन था. उन्हें खेल के मैदान पर कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी, और खेल के दौरान उन्हें कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा था. लेकिन अपनी पहचान को स्वीकार करना उनके लिए इससे बड़ी चुनौती थी.

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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