नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर पिछले कुछ समय से यह दावा किया जा रहा है कि भारत में जल्द ही कागज के नोटों की जगह प्लास्टिक नोट चलन में आ जाएंगे। इन दावों के बाद लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मौजूदा समय में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पूरे देश में प्लास्टिक नोट जारी करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

आरबीआई पहले भी प्लास्टिक या पॉलीमर नोटों पर अध्ययन कर चुका है। वर्ष 2018 में केंद्रीय बैंक ने सीमित स्तर पर पॉलीमर नोटों के परीक्षण की योजना की जानकारी दी थी, लेकिन इसके बाद देशभर में ऐसे नोट जारी करने का कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया। फिलहाल भारत में प्रचलन में मौजूद सभी बैंक नोट विशेष सुरक्षा कागज पर ही छापे जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीमर नोट सामान्य कागज के नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं। ये आसानी से फटते नहीं हैं, पानी और नमी से कम प्रभावित होते हैं तथा इनकी उम्र भी अधिक होती है। इसके अलावा इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर जोड़ना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है, जिससे नकली नोटों पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि प्लास्टिक नोटों को अपनाने से पहले कई पहलुओं पर विचार करना जरूरी होता है। इनकी छपाई की लागत, उत्पादन व्यवस्था, मशीनों की अनुकूलता, पर्यावरणीय प्रभाव और पुराने नोटों के निस्तारण जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। इसी कारण किसी भी बड़े बदलाव से पहले व्यापक परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन किया जाता है।

दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और रोमानिया में पॉलीमर नोट पहले से उपयोग में हैं। इन देशों का अनुभव बताता है कि ऐसे नोट लंबे समय तक चलते हैं और जल्दी खराब नहीं होते। इसी वजह से कई अन्य देश भी इस तकनीक को अपनाने पर विचार कर चुके हैं।

भारत में फिलहाल आरबीआई की ओर से कागज के नोट ही जारी किए जा रहे हैं। यदि भविष्य में पॉलीमर नोटों को लेकर कोई अंतिम फैसला लिया जाता है, तो उसकी आधिकारिक घोषणा आरबीआई और भारत सरकार द्वारा की जाएगी। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना आवश्यक है।


