Kathmandu:काठमांडू, 2 सितंबर 2026। नेपाल में पिछले सप्ताह हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने से आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड की आपदा के एक सप्ताह बाद भी हालात गंभीर बने हुए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मृतक संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जबकि लगभग 4,800 लोग अभी भी लापता हैं। सुरक्षा बलों ने अब तक 6,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाया है।यह आपदा 26 अगस्त 2026 को सुबह हुई थी। नेपाल-चीन (तिब्बत) सीमा के पास ऊपरी इलाके में ग्लेशियर के एक बड़े हिस्से के ढहने से बर्फ, चट्टान और कीचड़ का विशाल प्रवाह शुरू हुआ। यह बाढ़ भोटेकोशी नदी और फिर त्रिशूली नदी प्रणाली के माध्यम से नीचे की ओर तेजी से बढ़ी। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहुं, नवलपरासी और चितवन जैसे जिलों में भारी तबाही हुई।

कई गांव, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह नष्ट हो गईं।नेपाल पुलिस के अनुसार चितवन में सबसे अधिक 348 शव मिले हैं, इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 217, नवलपरासी पश्चिम में 190, नुवाकोट में 155, गोरखा में 66, धादिंग में 59, रसुवा में 45 और तनहुं में 38 शव बरामद हुए। कई अज्ञात शवों की पहचान के लिए पुलिस वेबसाइट पर विवरण अपलोड किए गए हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 16 मौतें और सैकड़ों लापता बताए गए हैं।बचाव अभियान में नेपाली सेना, पुलिस और अंतरराष्ट्रीय टीमें (भारत, चीन सहित) शामिल हैं। भारी मशीनरी, हेलीकॉप्टर और अस्थायी पुलों का इस्तेमाल कर दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचा जा रहा है। विशेष रूप से जलविद्युत परियोजनाओं और सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूरों को निकालने पर फोकस है। कुछ जगहों पर 279 मजदूरों को बचाया जा चुका है, लेकिन सैकड़ों अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने कहा है कि सरकार अब बचाव के साथ-साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर ध्यान दे रही है। प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी फैलने से रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हजारों लोग अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं। कई जगहों पर बिजली और संचार सेवाएं आंशिक रूप से बहाल हुई हैं।विशेषज्ञ इस आपदा को जलवायु परिवर्तन से जोड़ रहे हैं। हिमालय में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

सरकार ने कई जिलों में नए बाढ़ अलर्ट भी जारी किए हैं क्योंकि कुछ नदियों का जल स्तर बढ़ रहा है।यह नेपाल के लिए 2015 के भूकंप के बाद सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीमें पहुंच रही हैं। मृतकों की पहचान, लापता लोगों की खोज और प्रभावित परिवारों को सहायता देने का काम जारी है।


