Thursday, April 23, 2026
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इजराइल सेना ने फिलिस्तीनियों के लिए समुद्री जल पर भी प्रतिबंध लगा दिया :

इज़राइली सेना द्वारा समुद्र की नाकेबंदी गाजा पट्टी में फ़िलिस्तीनियों के लिए एक बड़ा मानवीय और आर्थिक संकट पैदा कर रही है। ये प्रतिबंध मछुआरों की आजीविका, पेयजल आपूर्ति और मानवीय सहायता तक पहुँच को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

Palestine :तटीय क्षेत्र वे क्षेत्र हैं जहाँ 2007 में हमास के नियंत्रण में आने के बाद से इज़राइल ने कड़ी नाकाबंदी लगा दी है। यह प्रतिबंध फ़िलिस्तीनियों की समुद्र तक पहुँच, मछली पकड़ने और अन्य तटीय गतिविधियों को प्रभावित करता है। इस विषय पर विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है:
• 2007 की नाकाबंदी: हमास द्वारा गाजा पर नियंत्रण करने के बाद, इज़राइल ने गाजा पट्टी पर पूर्ण नाकाबंदी लगा दी, जिसमें समुद्र, भूमि और हवाई मार्गों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए। इज़राइल का दावा है कि यह नाकाबंदी सुरक्षा कारणों से हमास को हथियारों की तस्करी से रोकने के लिए है।
• समुद्री सीमाएँ: इज़राइल ने गाजा के मछुआरों के लिए मछली पकड़ने की सीमा को सीमित कर दिया है। यह सीमा 3 से 12 समुद्री मील तक भिन्न है, जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों के हिसाब से बहुत कम है। ओस्लो समझौते ने फ़िलिस्तीनियों को 20 समुद्री मील तक मछली पकड़ने की अनुमति दी थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।

: फ़िलिस्तीनी मछुआरे गाजा तट से कुछ मील से अधिक दूर नहीं जा सकते। इज़राइली नौसेना अक्सर मछुआरों की नावों पर गोलीबारी करती है, उन्हें गिरफ़्तार करती है, या अगर वे निर्धारित सीमा से आगे निकल जाते हैं तो उनकी नावों और जालों को ज़ब्त कर लेती है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ये प्रतिबंध गाज़ा की अर्थव्यवस्था और मछुआरों की आजीविका को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाते हैं, क्योंकि मछली पकड़ना गाज़ा के 20 लाख निवासियों के भोजन का एक प्रमुख स्रोत है।
, इज़राइल ने सुरंगों को नष्ट करने के लिए गाज़ा के नीचे समुद्र को पानी से भरने की कथित तौर पर कोशिश की है, जिससे भूजल भंडार भी दूषित हो रहा है।
: गाज़ा तट के माध्यम से मानवीय सहायता वितरण भी सीमित है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी UNRWA ने बताया कि इज़राइली प्रतिबंधों के कारण 2 मार्च, 2025 से गाज़ा में सहायता की आपूर्ति रोक दी गई है, जिससे पानी, भोजन और दवा जैसी बुनियादी ज़रूरतों तक पहुँचना मुश्किल हो गया है।

: गाजा में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बुरी तरह प्रभावित हुई है। X पर कई पोस्ट के अनुसार, इज़राइल ने गाजा में पानी की आपूर्ति पूरी तरह से बंद कर दी है या प्रतिबंधित कर दी है, जिससे अस्पतालों और नागरिकों को भारी कठिनाई हो रही है।
, इज़राइली सेना ने पानी की बुनियादी ज़रूरत को हथियार बनाकर गाजा के अल-तुफ़ा क्षेत्र में एकमात्र जल विलवणीकरण संयंत्र को जानबूझकर नष्ट कर दिया।

इन प्रतिबंधों का मछुआरों की आय और गाजा के निर्यात पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। गीशा के अनुसार, गाजा का निर्यात 2007 से पहले के स्तर से काफी नीचे है और निर्माण सामग्री सहित “दोहरे उपयोग” वाली वस्तुओं के आयात पर भी कड़े प्रतिबंध हैं।

UNRWA और अन्य एजेंसियों ने बार-बार इज़राइल से गाजा में सहायता और बुनियादी सेवाओं तक पहुँच बहाल करने का आह्वान किया है।
दोनों देशों ने फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध किए गए अत्याचारों की निंदा की है और गाजा में पानी, भोजन और दवा की तत्काल व्यवस्था करने का आह्वान किया है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने फ़िलिस्तीनी अधिकारों के लिए अपना समर्थन दोहराया और इज़राइल के कार्यों की निंदा की।

• इज़राइली नाकाबंदी के परिणामस्वरूप गाजा के तटीय क्षेत्रों तक फ़िलिस्तीनी पहुँच गंभीर रूप से सीमित है। मछुआरों को लगातार खतरों का सामना करना पड़ रहा है और पानी की कमी ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है।
गाजा में जल आपूर्ति पर इज़राइली नियंत्रण नागरिकों के लिए, विशेष रूप से अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए, गंभीर कठिनाई पैदा कर रहा है।

 

: इज़राइली सेना द्वारा समुद्र की नाकेबंदी गाजा पट्टी में फ़िलिस्तीनियों के लिए एक बड़ा मानवीय और आर्थिक संकट पैदा कर रही है। ये प्रतिबंध मछुआरों की आजीविका, पेयजल आपूर्ति और मानवीय सहायता तक पहुँच को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से इस स्थिति पर ध्यान देने और फ़िलिस्तीनियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाने का आह्वान किया जा रहा है। यदि आपको अधिक जानकारी चाहिए या किसी विशिष्ट पहलू पर चर्चा करनी है, तो कृपया हमें बताएँ।

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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