Saturday, March 7, 2026
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गलगोटिया यूनिवर्सिटी इन दिनों चर्चा में क्यों है?

यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर नेहा सिंह ने DD न्यूज को इंटरव्यू में कहा कि ये रोबोट उनके यूनिवर्सिटी के "Centre of Excellence" में बनाया गया है।

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Noida: ग्रेटर नोएडा में स्थित  गलगोटिया यूनिवर्सिटी इन दिनों चर्चा में है। लोग इसे “गलघोटिया” कहकर ट्रोल कर रहे हैं। असल में ये एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है, जो इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट जैसी पढ़ाई कराती है। लेकिन हाल ही में हुई एक गलती ने इसे पूरे देश में बदनाम कर दिया।

यूनिवर्सिटी की शुरुआत कैसे हुई?

सुनील गलगोटिया ने 1980 में दिल्ली के कनॉट प्लेस में अपनी फैमिली की छोटी किताबों की दुकान से शुरुआत की। बाद में उन्होंने गलगोटिया पब्लिकेशंस नाम से किताबें छापने का काम शुरू किया। शुरुआत में सिर्फ 9000 रुपये का कर्ज लेकर काम शुरू किया था।2000 में उन्होंने गलगोटिया इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी शुरू किया, जहां सिर्फ 40 छात्र थे।

2011 में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई। आज इसका कैंपस 52 एकड़ में फैला है और हजारों छात्र पढ़ते हैं।

पूरा गलगोटिया ग्रुप आज 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बताया जाता है। इसमें यूनिवर्सिटी के अलावा पब्लिकेशन और दूसरे कॉलेज भी शामिल हैं।

हाल का बड़ा विवाद क्या है? (फरवरी 2026)

दिल्ली में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया। ये समिट भारत को AI में आगे दिखाने के लिए था।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपना स्टॉल लगाया। उन्होंने एक रोबोट डॉग (Robotic Dog) दिखाया, जिसका नाम “Orion” बताया।

यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर नेहा सिंह ने DD न्यूज को इंटरव्यू में कहा कि ये रोबोट उनके यूनिवर्सिटी के “Centre of Excellence” में बनाया गया है।

लेकिन जल्दी ही सच सामने आया – ये रोबोट चीन की कंपनी Unitree Robotics का Go2 मॉडल था, जो बाजार में 2 लाख रुपये से कम में मिलता है। ये भारत में नहीं बना था!

क्या हुआ इसके बाद? इसके बाद सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी को जमकर ट्रोल किया गया। लोग कहने लगे – “गलघोटिया” (गलती + गोटिया)।

सरकार  ने यूनिवर्सिटी के स्टॉल की बिजली काट दी और उन्हें समिट से बाहर निकलने को कहा।

यूनिवर्सिटी ने पहले इसे “प्रोपगैंडा” कहा, लेकिन बाद में माफी मांगी। कहा कि प्रोफेसर को सही जानकारी नहीं थी और वो ज्यादा उत्साह में आ गईं।

यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि वे दुनिया की अच्छी टेक्नोलॉजी दिखाकर छात्रों को सिखाते हैं, लेकिन खुद बनाने का दावा कभी नहीं किया।

कुछ छात्रों ने कहा – ये गलतफहमी थी। कुछ ने कहा देश की इज्जत को ठेस पहुंची, शर्म आती है।

सच्चाई ये है गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बड़ी प्राइवेट यूनिवर्सिटी है, जहां AI और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई होती है। लेकिन इस बार की गलती ने भारत की AI इमेज को नुकसान पहुंचाया। सरकार ने साफ कहा – “झूठी जानकारी को बढ़ावा नहीं देंगे, असली काम दिखाना चाहिए।अगर आप पढ़ाई के लिए अच्छी यूनिवर्सिटी ढूंढ रहे हैं, तो हमेशा NIRF रैंकिंग, प्लेसमेंट और असली रिव्यू चेक करें।

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