Delhi:नई दिल्ली, 5 अगस्त 2025: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मालेगांव ब्लास्ट केस में विशेष एनआईए कोर्ट के हालिया फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। संगठन के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इस फैसले को ‘अविश्वसनीय’ करार देते हुए कहा कि उनकी लीगल सेल अगस्त के पहले सप्ताह में हाईकोर्ट में अपील दायर करेगी। यह कदम 2008 में हुए मालेगांव बम विस्फोट मामले में सभी आरोपियों के बरी होने के बाद उठाया जा रहा है, जिसने देश में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।29 सितंबर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम विस्फोट में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे इस मामले में विशेष एनआईए कोर्ट ने हाल ही में सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। मौलाना मदनी ने कहा, “हमारा मानना है कि यह फैसला न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। हमारी लीगल टीम इस मामले को गंभीरता से ले रही है और हाईकोर्ट में मजबूत दलीलें पेश करेगी ताकि सच सामने आ सके।”जमीयत उलेमा-ए-हिंद की लीगल सेल ने पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई है। संगठन का दावा है कि वे इस केस में भी पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लीगल सेल के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि उनकी टीम ने एनआईए कोर्ट के फैसले का गहन अध्ययन किया है और कई खामियां पाई हैं, जिन्हें हाईकोर्ट में उठाया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य न केवल इस मामले में न्याय सुनिश्चित करना है, बल्कि यह भी दिखाना है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं।

“मालेगांव ब्लास्ट केस में शुरुआत में सात लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कर्नल पुरोहित जैसे नाम शामिल थे। लंबी जांच और सुनवाई के बाद, कोर्ट ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए सभी को बरी कर दिया। इस फैसले ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं उकसाई हैं। कई संगठनों और व्यक्तियों ने इसे न्याय प्रणाली पर सवाल उठाने का मौका बताया है।जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी समुदाय या व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि दोषियों को सजा मिले और पीड़ितों को इंसाफ।

मौलाना मदनी ने कहा, “हम शांति और एकता में विश्वास करते हैं, लेकिन अन्याय के खिलाफ चुप रहना हमारे सिद्धांतों के खिलाफ है।”बॉम्बे हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू होने पर सभी की निगाहें न्याय प्रणाली पर होंगी। यह केस न केवल मालेगांव बल्कि पूरे देश में न्याय और जवाबदेही के मुद्दों को फिर से चर्चा में ला सकता है।


