GazaFlisteen:अनस अल-शरीफ, एक 28 वर्षीय पत्रकार, अल जज़ीरा अरबी के प्रमुख संवाददाता थे, जिन्होंने गाजा पट्टी में इजरायल-हमास युद्ध (7 अक्टूबर 2023 से शुरू) के दौरान अपनी निडर पत्रकारिता से दुनिया का ध्यान खींचा। जाबालिया शरणार्थी शिविर में जन्मे अनस ने गाजा में युद्ध की भयावहता, भुखमरी और विनाश को अपनी रिपोर्टिंग के माध्यम से विश्व के सामने लाया। उनके 500,000 से अधिक फॉलोअर्स वाले एक्स अकाउंट पर उनकी अंतिम पोस्ट में गाजा शहर पर इजरायली बमबारी की तीव्रता को दर्शाया गया था, जो उनकी मृत्यु से कुछ मिनट पहले पोस्ट की गई थी।10 अगस्त 2025 को, अनस अल-शरीफ और उनके चार सहयोगी—मोहम्मद करीक, इब्राहिम ज़हेर, मोहम्मद नौफल और मोअमेन अलीवा—गाजा शहर के अल-शिफा अस्पताल के मुख्य द्वार के पास पत्रकारों के लिए बनाए गए एक तंबू पर इजरायली हवाई हमले में मारे गए। इस हमले में एक अन्य फ्रीलांस पत्रकार, मोहम्मद अल-खालिदी भी शहीद हुए।अल जज़ीरा ने इसे “लक्षित हत्या” करार देते हुए प्रेस स्वतंत्रता पर हमला बताया।

इजरायली सेना ने दावा किया कि अनस एक हमास आतंकी सेल का नेतृत्व कर रहे थे और इजरायली नागरिकों व सैनिकों पर रॉकेट हमलों में शामिल थे। सेना ने कुछ दस्तावेज और तस्वीरें पेश कीं, जिनमें अनस को हमास नेताओं के साथ दिखाया गया। हालांकि, अल जज़ीरा और संयुक्त राष्ट्र की विशेष Rapporteur इरेन खान ने इन दावों को “निराधार” बताते हुए खारिज किया। संयुक्त राष्ट्र और कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने पहले ही अनस की सुरक्षा को लेकर चेतावनी दी थी, क्योंकि इजरायली सेना ने उन्हें बार-बार धमकी दी थी।

अनस ने अपनी मृत्यु से पहले एक मार्मिक संदेश छोड़ा था, जिसमें उन्होंने लिखा, “मैंने कभी भी सच को बिना तोड़े-मरोड़े बताने में संकोच नहीं किया। गाजा को मत भूलना।” उनकी पत्रकारिता गाजा में भुखमरी और युद्ध की वास्तविकता को उजागर करती थी, जिसके कारण वह इजरायली सेना के निशाने पर थे। युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायल ने 200 से अधिक पत्रकारों को मार गिराया है, जिसमें कई अल जज़ीरा के पत्रकार शामिल हैं।अनस की मृत्यु ने विश्व भर में आक्रोश पैदा किया। कनाडा, ब्रिटेन और कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने इस हमले की निंदा की। CPJ ने इसे “सबसे घातक पत्रकारिता संघर्ष” करार दिया, जिसमें 186 पत्रकार मारे जा चुके हैं। अनस ने अपनी पत्नी बयान और दो बच्चों, सलाह और शम को पीछे छोड़ा। उनकी अंतिम इच्छा थी कि गाजा की पीड़ा को विश्व न भूले।

अनस की शहादत ने गाजा में पत्रकारों के सामने आने वाले खतरों को फिर से उजागर किया है। उनकी साहसी पत्रकारिता और सच्चाई के प्रति समर्पण हमेशा याद किया जाएगा।


