Greater Noida: ग्रेटर नोएडा के उंची दनकौर गांव के 19 वर्षीय दीपक की जिंदगी उस समय बदल गई, जब 3 अगस्त 2025 की रात उनके बैंक खाते में ₹10,01,35,60,00,00,00,00,00,01,00,23,56,00,00,00,00,299 (लगभग 1.13 लाख करोड़ रुपये) जमा होने का नोटिफिकेशन आया। यह खाता उनकी मृत मां गायत्री देवी के नाम पर था, जिसका उपयोग दीपक छोटे-मोटे यूपीआई लेनदेन के लिए करते थे। यह राशि इतनी विशाल थी कि यह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों और देशों के जीडीपी से भी अधिक थी।

दीपक, जो हाल ही में अपने माता-पिता को खो चुके थे, इस नोटिफिकेशन को देखकर हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत दोस्तों को मैसेज भेजा और अगले दिन कोटक महिंद्रा बैंक की शाखा में पहुंचे। बैंक ने इस राशि की पुष्टि की, लेकिन इसे संदिग्ध मानते हुए खाता फ्रीज कर दिया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह NAVI UPI ऐप में तकनीकी गड़बड़ी के कारण था, क्योंकि फोनपे और बैंक स्टेटमेंट में खाते में शून्य बैलेंस दिखा। कोटक महिंद्रा बैंक ने दावा खारिज करते हुए कहा कि कोई राशि जमा नहीं हुई और सिस्टम सुरक्षित है। पुलिस और आयकर विभाग इसकी जांच कर रहे हैं, यह देखते हुए कि क्या यह साइबर धोखाधड़ी या मनी लॉन्ड्रिंग का प्रयास था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी त्रुटि थी, क्योंकि इतनी बड़ी राशि का वास्तविक हस्तांतरण असंभव है।

खबर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई। लोग दीपक को “विश्व का सबसे अमीर व्यक्ति” कहकर मजाक उड़ाने लगे। इसने डिजिटल बैंकिंग की कमियों और अफवाहों के तेजी से फैलने की प्रवृत्ति को उजागर किया। दीपक के लिए यह एक क्षणिक “अमीर बनने का सपना” था, जो जल्द ही टूट गया। खाता फ्रीज होने से वह छोटे लेनदेन भी नहीं कर पाए।

सावधान : ऐसी स्थिति में तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें, राशि का उपयोग न करें, और खबरों की सत्यता जांचें। यह घटना डिजिटल युग में तकनीकी सावधानी की जरूरत को दर्शाती है।


