Sudan:2 सितंबर 2025, सूडान के पश्चिमी दारफुर क्षेत्र में मर्रा पहाड़ों (Marra Mountains) में 31 अगस्त 2025 को एक खतरनाक भूस्खलन ने तारासिन नाम के गाँव को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। इस हादसे में अनुमानित 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और सिर्फ एक व्यक्ति जिंदा बचा। यह सूडान के इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में से एक है, जो उस समय आई जब देश पहले से ही युद्ध और इंसानी संकट से जूझ रहा है
क्या हुआ था
सूडान लिबरेशन मूवमेंट/आर्मी (SLM/A), जो इस क्षेत्र को नियंत्रित करता है,उसने बताया कि यह भूस्खलन पिछले एक हफ्ते की भारी बारिश के कारण हुआ। मर्रा पहाड़, जो अपने घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों के लिए मशहूर हैं, 31 अगस्त को यह भयंकर हादसा हुआ। SLM/A के बयान के मुताबिक, “तारासिन गाँव के लगभग 1,000 से ज्यादा निवासी इस भूस्खलन में मारे गए,और सिर्फ एक व्यक्ति जिंदा मिला।” गाँव पूरी तरह मिट्टी में मिल गया है। मर्रा पहाड़ों के एक समाचार आउटलेट ने वीडियो फुटेज शेयर की, जिसमें पहाड़ों के बीच एक जगह दिखी, जहाँ लोग तलाशी में जुटे थे।
दारफुर के सैन्य नियंत्रित गवर्नर, मिन्नी मिनावी, ने इस घटना को “एक बड़ी इंसानी त्रासदी” बताया। उन्होंने कहा, “यह संकट हमारे लोगों के लिए अकेले सहन करना असंभव है।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय इंसानी सहायता संगठनों से तुरंत मदद की गुहार लगाई।
भूस्खलन क्यों हुआ?
मर्रा पहाड़ एक ज्वालामुखी क्षेत्र है, जहाँ का मौसम बाकी सूडान से अलग है। जुलाई से अक्टूबर तक यहाँ बारिश का मौसम रहता है, जो अक्सर बाढ़ और भूस्खलन का कारण बनता है। इस साल की भारी बारिश ने पहाड़ों की मिट्टी को इतना कमजोर कर दिया कि यह भयानक भूस्खलन हुआ। यूनिसेफ के अनुसार, मर्रा पहाड़ एक विश्व विरासत स्थल है, लेकिन यह प्राकृतिक आपदाओं के लिए भी जोखिम भरा है। पिछले साल रेड सी प्रांत में एक बाँध टूटने से 30 लोग मारे गए थे, लेकिन इस बार का भूस्खलन इतना भयानक था कि इसने एक पूरा गाँव ही मिटा दिया।

सूडान का गहरा संकट
सूडान पिछले दो साल से एक क्रूर गृहयुद्ध से गुजर रहा है, जो अप्रैल 2023 में शुरू हुआ। यह युद्ध सूडानी सेना के प्रमुख अब्देल फतह अल-बुरहान और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के कमांडर मोहम्मद हमदान दागलो के बीच सत्ता के संघर्ष के कारण छिड़ा। इस युद्ध ने सूडान को दुनिया के सबसे बड़े इंसानी संकटों में से एक में धकेल दिया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सूडान में 2.5 करोड़ से ज्यादा लोग इंसानी सहायता के मोहताज हैं। दारफुर, जो पहले से ही युद्ध से तबाह है, अब इस भूस्खलन ने और दुख जोड़ दिया है।

बचाव और तलाशी का काम
SLM/A ने बताया कि तलाशी और बचाव का काम जारी है, लेकिन युद्ध और खराब सड़कों के कारण मदद पहुँचाना मुश्किल है। गवर्नर मिनावी ने कहा, “हमें खाना, दवा, और आश्रय की तुरंत जरूरत है।” अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद की अपील की गई है, लेकिन दारफुर की खराब सुरक्षा स्थिति के कारण यह काम आसान नहीं है।
एक जिंदा बचे की उम्मीद
इस भयंकर त्रासदी में एक व्यक्ति के जिंदा बचने की खबर ने थोड़ी सी उम्मीद जगाई है। अभी तक इस व्यक्ति की पहचान या उसके बचने की कहानी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिली, लेकिन यह इस अंधेरे में एक छोटी सी रोशनी है।
अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत
यह भूस्खलन सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सूडान के चल रहे संकट का एक हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से खाना, दवा, और आश्रय के रूप में मदद की अपील की गई है। लेकिन युद्ध और खराब बुनियादी ढाँचे के कारण यह मदद पहुँचाना एक बड़ी चुनौती है।

आगे क्या?
सूडान के लोग न सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं से, बल्कि युद्ध, भुखमरी, और बेघर होने से भी लड़ रहे हैं। यह भूस्खलन एक और कड़वा सच है, जो सूडान के दुखों को और गहरा कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद के बिना इस संकट से उबरना मुश्किल होगा।
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आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.
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