Saturday, March 7, 2026
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सालेह अल-जफरावी की शहादत:

गाजा के मशहूर पत्रकार सालेह अल-जफरावी की शहादत, इजरायली समर्थित मिलिशिया पर हमले का आरोप

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

Palestine Gaza: गाजा में सीजफायर के बाद भी हिंसा, पत्रकारों पर हमले की नीति का दावाप्रकाशन तिथि: 13 अक्टूबर 2025गाजा सिटी: फलस्तीनी पत्रकार और सोशल मीडिया प्रभावक सालेह अल-जफरावी (Saleh Al-Jafarawi) की 12 अक्टूबर 2025 को गाजा सिटी के सबरा मोहल्ले में गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना इजरायली सेना की वापसी और अमेरिका की मध्यस्थता वाले सीजफायर के कुछ दिन बाद हुई, जिसमें बंधकों और कैदियों की अदला-बदली और मानवीय सहायता की पहुंच का वादा किया गया था। सालेह, जिन्हें “मिस्टर FAFO” (Fuck Around and Find Out) के नाम से भी जाना जाता था, गाजा की तबाही और मानवीय संकट को दुनिया तक पहुंचाने के लिए मशहूर थे।

सालेह अल-जफरावी कौन थे? 28 वर्षीय सालेह गाजा सिटी के निवासी थे। वह एक स्वतंत्र पत्रकार थे, जिनके इंस्टाग्राम पर 30 लाख से अधिक फॉलोअर्स थे। वह टिकटॉक, ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब पर भी सक्रिय थे। उनकी वीडियो में गाजा में इजरायली बमबारी, भुखमरी और विस्थापन की तस्वीरें थीं, जो फलस्तीनी दृढ़ता को दर्शाती थीं। उन्होंने “व्हेयर आर यू, ह्यूमैनिटी?” जैसे गाने भी बनाए, जो गाजा की स्थिति पर आधारित थे। फलस्तीनी उन्हें “गाजा की आवाज” कहते थे, जबकि इजरायली अधिकारियों ने उन्हें “हमास का प्रचारक” करार दिया।

शहादत की घटनास्थान और समय: 12 अक्टूबर 2025 को दोपहर में, गाजा सिटी के दक्षिणी सबरा मोहल्ले में सालेह तबाही की रिकॉर्डिंग और सशस्त्र झड़पों की रिपोर्टिंग कर रहे थे। वह प्रेस लिखा हुआ जैकेट पहने थे।

हमला: फलस्तीनी स्रोतों और अल जजीरा के अनुसार, सालेह को सिर में गोली मारी गई। हमलावर इजरायल से जुड़े “दघमश (Daghmash) मिलिशिया” थे, जो हमास की सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ रहे थे। गाजा की आंतरिक मंत्रालय के एक वरिष्ठ स्रोत ने इसे “इजरायली समर्थित मिलिशिया” का हमला बताया। बाद में इस मिलिशिया को घेर लिया गया और 60 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।

सत्यापन: अल जजीरा की सनद एजेंसी ने सालेह के शव की वीडियो सत्यापित की। कुद्स न्यूज नेटवर्क और अल-अरबी अल-जदीद ने भी इसे इजरायली समर्थित तत्वों का हमला बताया। गाजा सरकार के मीडिया कार्यालय ने इसे “पत्रकारों पर इजरायली हमलों की नीति का हिस्सा” करार दिया।

खतरों का इतिहासपिछले खतरे: सालेह को इजरायली सेना से बार-बार धमकियां मिलती थीं। उनका नाम इजरायली सरकार के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर “रेड लिस्ट” में था। फरवरी 2024 में अल-नासर अस्पताल की निकासी की रिपोर्टिंग के दौरान वह ड्रोन हमले में घायल हुए थे। अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में 270 से अधिक पत्रकार मारे जा चुके हैं, जो इसे पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक संघर्ष बनाता है।

सीजफायर का संदर्भ: सालेह ने सीजफायर की घोषणा पर खुशी जताई थी और तबाही की तस्वीरें साझा की थीं। यह घटना मिस्र के शर्म अल-शेख में सीजफायर शिखर सम्मेलन से पहले हुई, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फलस्तीनी प्राधिकरण के अध्यक्ष महमूद अब्बास और मिस्र, कतर, तुर्की के मध्यस्थ शामिल थे।

प्रतिक्रियाएंफलस्तीनी और मीडिया: फलस्तीनी पत्रकारों ने सालेह को “हीरो” और “गाजा का प्रतिभाशाली” बताया। अल जजीरा, अल-मायादीन और पालेस्टाइन क्रॉनिकल ने कड़ी निंदा की। फलस्तीनी प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हुसैन अल-शेख ने गाजा की बहाली पर बातचीत का जिक्र किया।

इजरायली प्रतिक्रिया: कुछ इजरायली कार्यकर्ताओं ने इसे “हमास प्रचारक की मौत” कहकर खुशी जताई और कहा कि सालेह ने 1.3 करोड़ डॉलर की फंडरेजिंग की थी। इजरायल हायोम और जेरूसलम पोस्ट ने खबर दी, लेकिन सत्यापन नहीं किया।

  सोशल मीडिया: रेडिट और थ्रेड्स पर लोगों ने शोक जताया, जैसे “वह 2 साल के नरसंहार से बचे, लेकिन इस भ्रष्ट दुनिया से दूर अब शांति में हैं।” नवंबर 2024 में उनकी मौत की झूठी अफवाहों का भी जिक्र हुआ।

निष्कर्ष: सालेह अल-जफरावी की शहादत गाजा में पत्रकारों की सुरक्षा और आंतरिक संघर्षों की गंभीरता को उजागर करती है। उनकी मौत ने दुनिया भर में फलस्तीनी पत्रकारों के बलिदान को फिर से चर्चा में ला दिया।

 

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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