Wednesday, October 21, 2026
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अकरम अबू बकर की सच्ची कहानी: 23 साल बाद वापसी और प्यार की जीत :

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Iram Fatima
Iram Fatima
मेरा नाम इरम फातिमा है। मैं मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली हूं और मैंने पत्रकारिता करियर दो साल पहले एक अखबार के साथ शुरू किया था और वर्तमान में पिछले कुछ महीनों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हूं और ग्लोबल बाउंड्री में असिस्टेंट कंटेंट प्रोडूसर के रूप में काम कर रही हूं।

Palestine :अकरम अबू बकर एक फिलिस्तीनी इंसान हैं। वो तुलकिरम शहर में रहते थे। ये उनकी असली कहानी है, जो दर्द, कुर्बानी और वफ़ा की मिसाल है।

गिरफ़्तारी और लंबी जेल :

साल 2002 में इज़राइली फ़ौज ने अकरम को पकड़ लिया। उन पर इल्ज़ाम था कि वो फिलिस्तीन की आज़ादी की लड़ाई में शामिल थे। कोर्ट ने उन्हें तीन उम्रकैद की सज़ा दी, यानी वो कभी बाहर न आते। उस वक़्त अकरम शादीशुदा थे। उनकी बीवी घर पर अकेली रह गईं।

तलाक़ का दर्द भरा फ़ैसला :

जेल में अकरम ने सोचा, “मेरी बीवी ज़िंदगी भर इंतज़ार न करे। वो दोबारा शादी कर के खुश रहे।” इसलिए उन्होंने जेल से ही बीवी को तलाक़ दे दी। ये बहुत बड़ा त्याग था। लेकिन उनकी बीवी ने दिल से तलाक़ नहीं माना। उन्होंने दोबारा शादी नहीं की और हर रोज़ दुआ मांगी, “ऐ अल्लाह, अकरम को वापस ला।

रिहाई: 23 साल बाद आज़ादी :

24 अक्टूबर 2025 को ग़ज़ा में इज़राइल और हमास के बीच युद्धविराम हुआ। इस समझौते में 250 फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ा गया। अकरम भी उनमें थे। वो 23 साल बाद आज़ाद हुए। लेकिन इज़राइल ने उन्हें फिलिस्तीन वापस नहीं जाने दिया। अकरम को मिस्र भेज दिया गया। वो अब 50 साल के हो चुके थे, कमज़ोर थे, लेकिन हिम्मत नहीं हारे।

फिर मिलन और दोबारा शादी :

जैसे ही रिहाई की ख़बर मिली, उनकी पूर्व बीवी मिस्र पहुँच गईं। 19 अक्टूबर 2025 को दोनों ने फिर से निकाह कर लिया। छोटी-सी तक़रीब थी, बस परिवार और दोस्त। अकरम ने कहा, “तुम्हारी वफ़ा ने मुझे ज़िंदा रखा। तलाक़ तो कागज़ था, दिल कभी अलग नहीं हुआ।” बीवी ने कहा, “मैंने 23 साल इंतज़ार किया, हर नमाज़ में तुम्हारे लिए दुआ की।

 

सबक और उम्मीद :

ये कहानी बताती है कि सच्चा प्यार और सब्र दीवारें तोड़ सकता है। आज अकरम और उनकी बीवी मिस्र में नई ज़िंदगी जी रहे हैं। ये सिर्फ़ एक जोड़े की कहानी नहीं, बल्कि फिलिस्तीनी कैदियों की हिम्मत की मिसाल है। अल्लाह सबको हिम्मत

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  • मेरा नाम इरम फातिमा है। मैं मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली हूं और मैंने पत्रकारिता करियर दो साल पहले एक अखबार के साथ शुरू किया था और वर्तमान में पिछले कुछ महीनों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हूं और ग्लोबल बाउंड्री में असिस्टेंट कंटेंट प्रोडूसर के रूप में काम कर रही हूं।

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