New Delhi: नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2025: भारतीय न्याय व्यवस्था में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है, जहां 18 साल की कठोर कैद के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2007 के रामपुर सीआरपीएफ कैंप हमले के मामले में पांच निर्दोष मुसलमान युवकों को आतंकवाद के सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह फैसला न केवल उन बेगुनाहों के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि उन परिवारों के लिए भी आशा की किरण है जो वर्षों से न्याय के इंतजार में तड़प रहे थे। जमीअत उलेमा-ए-हिंद की लीगल सेल ने इस मामले में अथक प्रयास कर एक बार फिर साबित किया कि सच्चाई अंततः जीत ही जाती है।

यह घटना 31 दिसंबर 2007 की है, जब उत्तर प्रदेश के रामपुर में सीआरपीएफ कैंप पर हमले में कई जवान शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद पुलिस ने आतंकवाद निरोधक कानून यूएपीए (UAPA) के तहत कई लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें से पांच युवक—मोहम्मद शरीफ, सबाहुद्दीन, इमरान शाहजाद, मोहम्मद फारूक और जंग बहादुर खान—को निचली अदालत ने 2019 में फांसी या आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच—जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा—ने सुनवाई के दौरान सबूतों की कमी, विरोधाभासी गवाहियों और जांच में खामियों को आधार बनाते हुए सभी को बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और आतंकवाद का कोई केस नहीं बनता।

हालांकि, इन पांचों को आर्म्स एक्ट के तहत 10 साल की सश्रम कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है, जिसके खिलाफ जमीअत उलेमा-ए-हिंद इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर करेगी। ये युवक पिछले 17-18 साल से जेल में सड़ रहे थे, जहां उन्होंने अपनी मासूमियत का दावा करते हुए हर पल न्याय की प्रतीक्षा की। उनके वकीलों—एम.एस. खान, अनिल बाजपेयी और सिकंदर खान—ने जमीअत उलेमा महाराष्ट्र (अरशद मदनी) लीगल एड कमिटी की ओर से केस लड़ा। उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि घटनास्थल पर कोई गोलीबारी के निशान नहीं मिले, जबकि आरोपी युवकों पर गोली चलाने का आरोप था। साथ ही, गवाहों की गवाहियां आपस में बिल्कुल विरोधाभासी थीं और साक्ष्य नष्ट हो चुके थे।

जमीअत उलेमा-ए-हिंद की प्रतिक्रिया: ‘सत्य और न्याय का ऐतिहासिक दिन‘ :
जमीअत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इस फैसले का हार्दिक स्वागत करते हुए इसे ‘सत्य और न्याय का ऐतिहासिक दिन’ करार दिया। एक बयान में उन्होंने कहा, “आज उन निर्दोष परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, जिन्हें आतंकवाद के झूठे आरोपों में 18 लंबे सालों तक इंसाफ का इंतजार करना पड़ा। इन 18 वर्षों की पीड़ा और दर्द की कल्पना से परे है। यह जमीअत उलेमा महाराष्ट्र की लीगल सेल की एक और बड़ी उपलब्धि है, जिसने चार को फांसी और एक को आजीवन कारावास की सजा से मुक्त कराया। हम आर्म्स एक्ट के फैसले के खिलाफ भी अपील करेंगे, क्योंकि यह भी अन्यायपूर्ण है।
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मौलाना मदनी ने आगे जोर देकर कहा, “यह फैसला भारतीय न्यायपालिका की निष्पक्षता पर भरोसे को मजबूत करता है। जमीअत उलेमा-ए-हिंद 2007 से अपनी लीगल सेल के जरिए निर्दोष मुसलमानों को कानूनी सहायता प्रदान कर रही है, और अब तक 400 से अधिक बरी करवाने में सफलता पा चुकी है। लेकिन यह भी एक चेतावनी है कि यूएपीए जैसे कठोर कानूनों का दुरुपयोग अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए हो रहा है। हमें ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी सुधारों की जरूरत है।” उन्होंने उन सभी वकीलों और समर्थकों का आभार जताया जिन्होंने इस लंबी लड़ाई में साथ दिया।

जमीअत उलेमा-ए-हिंद की लीगल सेल, जो मौलाना अरशद मदनी द्वारा 2007 में स्थापित की गई थी, ने अब तक देशभर में 700 से अधिक आतंकवाद से जुड़े मामलों में कानूनी मदद दी है। इस संगठन का मानना है कि कई निर्दोष मुसलमान युवक पूर्वाग्रहपूर्ण जांच के शिकार हो जाते हैं, और उनकी लीगल एड कमिटी इनकी आवाज बनती है। इस केस में भी, जमीअत ने न केवल वकीलों की व्यवस्था की, बल्कि परिवारों को आर्थिक और भावनात्मक समर्थन भी दिया।

व्यापक प्रभाव: अल्पसंख्यक अधिकारों पर बहस छिड़ी :
यह फैसला न केवल इन पांच युवकों के लिए राहत है, बल्कि पूरे देश में यूएपीए और अन्य एंटी-टेरर कानूनों के दुरुपयोग पर बहस को तेज कर देगा। मानवाधिकार संगठन और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कानून अक्सर अल्पसंख्यकों और राजनीतिक असहमतियों को दबाने के हथियार बन जाते हैं। जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने इस संदर्भ में सरकार से अपील की है कि निर्दोषों को फंसाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो और मुआवजे का प्रावधान बने।

ये पांच युवक अब जेल से रिहा होकर अपने परिवारों के आगोश में लौट सकेंगे। मोहम्मद शरीफ के भाई ने कहा, “हमारा भाई बेगुनाह था, लेकिन 18 साल की जुदाई ने हमें तोड़ दिया था। जमीअत के बिना यह इंसाफ असंभव था।” यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि न्याय में देरी, न्याय का हनन है।
जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने सभी समुदायों से एकजुट होकर न्यायपूर्ण समाज बनाने का आह्वान किया है।


