Saturday, March 7, 2026
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गज़ा में संघर्ष विराम डील का ऐलान: जानिये क्या है शर्ते

संघर्ष विराम की खबर के बाद गज़ा और वेस्ट बैंक में ख़ुशी का माहौल है. लोग राहत की साँस ले रहे हैं कि अब उन पर बम नहीं गिरेंगे. दूसरी तरफ, इज़राइल में बंधकों के परिवार अपने अपनों से मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. हालांकि, डील के बाद राहत की उम्मीदें जगी हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इज़राइल की नीयत पर संदेह बना रहेगा.

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

Gaza: 15 महीने की लंबी जंग, बर्बादी और अनगिनत मौतों के बाद आखिरकार गज़ा और इज़राइल के बीच सीज़फायर की डील का ऐलान कर दिया गया है. यह डील कतर की राजधानी दोहा में 15 जनवरी को हुई, जिसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच तनाव को कम करना है. इस डील ने जहां गज़ा के आम नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद जगाई है, वहीं इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के लिए यह एक नई चुनौती साबित हो रही है.

इज़राइल ने 8 अक्टूबर 2023 को गज़ा में ऑपरेशन शुरू किया था. उनका दावा था कि इस मिशन के तहत दो बड़े लक्ष्य हासिल किए जाएंगे. हमास की कैद में बंधक बनाए गए इज़राइली नागरिकों को छुड़ाना इसके साथ ही हमास को पूरी तरह से खत्म देना. लेकिन 15 महीने की बमबारी और लाखों निर्दोषों की मौत के बाद भी इज़राइल अपने इन लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रहा. हमास ने न केवल इज़राइल की सेना का डटकर मुकाबला किया, बल्कि उन्हें गोरिल्ला युद्ध में उलझाकर पीछे हटने पर मजबूर कर दिया.

संघर्ष विराम डील तीन चरणों में लागू होगी:

  1. 19 जनवरी से सीज़फायर लागू होगा. इज़राइल 2,000 फलस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा, जिनमें से 250 उम्रकैद की सज़ा काट रहे हैं. हमास 33 इज़राइली बंधकों को रिहा करेगा और रफा क्रॉसिंग खोली जाएगी, जिससे गज़ा के घायल नागरिकों को इलाज के लिए बाहर ले जाया जा सकेगा.

2. इज़राइल को फिलाडेल्फिया कॉरीडोर से स्थायी रूप से अपनी सेना हटानी होगी.

3. हमास उन बंधकों के शव सौपेंगा, जो उसकी कैद के दौरान मारे गए. इसके बदले इज़राइल गज़ा के पुननिर्माण के लिए योजना बनाएगा.

हालांकि इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू डील पर सहमती जताने में अब तक हिचकिचा रहे हैं. उनके सरकार में शामिल दक्षिणपंथी दल, जैसे तमार बेन और बेज़ल इमेट्रिक, इस डील के खिलाफ हैं. इन नेताओं ने धमकी दी हैं कि अगर कैदियों को रिहा किया गया तो वह सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे.

फ़िलहाल गज़ा में स्थिति भयावह है. 23 लाख की आबादी में 90% लोग बेघर हो चुके हैं, सैकड़ों अस्पताल तबाह हो गए हैं इसी के साथ संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों का अनुमान है कि हजारों नागरिक मारे गए हैं. इस तबाही के बावजूद, हमास ने अपने संगठन को न केवल बचाए रखा बल्कि रीऑर्गेनाइज़ भी किया है. संगठन ने नई भर्तियां की हैं और खुद को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया है. डील में अमेरिका की भूमिका अहम रही है. पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प और मौजूदा राष्ट्रपति बाईडेन दोनों इसका क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, सवाल यह है कि गज़ा के पुननिर्माण की ज़िम्मेदारी कौन लेगा.

इस डील ने गज़ा और इज़राइल दोनों को राहत दी है. गज़ा के लोग बमबारी से बचने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि इज़राइल के नागरिक अब सुकून से सोने की आस लगाए बैठे हैं. गज़ा के लोगों की हिम्मत और हमास की रणनीति ने इज़राइल को सीज़फायर के लिए मजबूर कर दिया. अब देखना यह है कि इस समझौते के तहत शांति बहाल होती है या यह केवल एक अस्थायी विराम साबित होता है. संघर्ष विराम की खबर के बाद गज़ा और वेस्ट बैंक में ख़ुशी का माहौल है. लोग राहत की साँस ले रहे हैं कि अब उन पर बम नहीं गिरेंगे.

दूसरी तरफ, इज़राइल में बंधकों के परिवार अपने अपनों से मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. हालांकि, डील के बाद राहत की उम्मीदें जगी हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इज़राइल की नीयत पर संदेह बना रहेगा. उसने यह लिखित रूप से वादा नहीं किया है कि वह भविष्य में गज़ा पर हमला नहीं करेगा. इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच अविश्वास गहरा है.

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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