Up:उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर जिले में अल-फारूक इंटर कॉलेज के प्रबंधक मौलाना शब्बीर अहमद मदनी की गिरफ्तारी ने भारत में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 24 जुलाई, 2025 को उन्हें नौकरी के बदले धर्म परिवर्तन के आरोप में डोमरियागंज में गिरफ्तार किया गया था। यह घटना एक स्थानीय व्यक्ति, अखण्ड प्रताप सिंह की शिकायत पर आधारित है, जिसने दावा किया था कि मौलाना शब्बीर ने उसे नौकरी के बदले इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला था। इस मामले ने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक हलकों में गरमागरम बहस छेड़ दी है।

अखण्ड प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा, जिसमें आरोप लगाया गया कि 2021 में मौलाना शब्बीर ने उन्हें अल-फारूक इंटर कॉलेज में नौकरी के लिए धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा। उन्होंने दावा किया कि मौलाना एक कथित एजेंट जलालुद्दीन उर्फ छांगुर के साथ संगठित धर्म परिवर्तन गतिविधियों में शामिल थे। इस शिकायत पर, डोमरियागंज पुलिस ने उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम, 2021 के तहत मामला दर्ज किया और मौलाना शब्बीर को गिरफ्तार कर लिया। कानून में बलपूर्वक या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने पर कड़ी सज़ा का प्रावधान है। मौलाना शब्बीर ने आरोपों को “राजनीतिक साज़िश” करार देते हुए खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि अखंड प्रताप 2021 में कॉलेज नहीं गए थे और स्थानीय पत्रकारों व राजनीतिक तत्वों ने आर्थिक लाभ के लिए ये आरोप गढ़े हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि अखंड प्रताप कोविड-19 के दौरान 14 दिनों तक कॉलेज में क्वारंटीन में रहे, लेकिन उनका धर्म परिवर्तन नहीं हुआ। मौलाना के वकील ने अदालत को बताया कि आरोप निराधार हैं और सबूतों के अभाव में मामला कमज़ोर है। गिरफ़्तारी ने राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने इसे दलित और मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव बढ़ाने की कोशिश बताया और निष्पक्ष जाँच की माँग की। इससे सामाजिक सौहार्द को खतरा हो सकता है। मौलाना शब्बीर को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है और स्थानीय अदालत में मुकदमा चल रहा है। क़ानूनी जानकारों का कहना है कि अखंड परताप के दावों की पुष्टि के लिए ठोस सबूतों की ज़रूरत है, वरना मामला कमज़ोर हो सकता है।

स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए डोमरियागंज में सुरक्षा बढ़ा दी है। यह घटना उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण कानूनों और उनके संभावित दुरुपयोग पर बहस को हवा दे रही है। कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, जबकि अन्य इसे धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के प्रयास के रूप में देखते हैं। अपनी शैक्षणिक सेवाओं के लिए प्रसिद्ध अल-फारूक इंटर कॉलेज इस विवाद से प्रभावित हो सकता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, सभी की निगाहें इसकी प्रगति पर टिकी हैं, और यह देखना बाकी है कि अदालत का अंतिम फैसला क्या होगा। यह खबर अल-फारूक इंटर कॉलेज के प्रबंधक की गिरफ्तारी के साथ नवीनतम स्थिति को समेटती है, जो भारत में धार्मिक और राजनीतिक संवेदनशीलता को दर्शाती है।



