Saturday, March 7, 2026
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सफा इंस्टीट्यूट द्वारा “अल्पसंख्यक मुद्दों पर समाचार पोर्टलों की भूमिका” विषय पर परिचर्चा :

कार्यक्रम समन्वयक और पत्रकार सलीम आजाद (एडिटर, ग्लोबल बाउंड्री) ने समाचार पोर्टल शुरू करने की जरूरत और तरीके पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि कम बजट में भी पोर्टल बनाया जा सकता है और प्रशिक्षित लोग इसे बेहतर तरीके से चला सकते हैं। यह समुदाय के मुद्दों को सामने लाने का अच्छा माध्यम है।राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार गुफरान नसीम ने कहा कि पत्रकारिता जितनी जरूरी है, उतनी ही संवेदनशील भी है। बिना सबूत के कोई बात नहीं कहनी चाहिए। सोशल मीडिया पर मिलने वाली खबरों की जांच जरूरी है और फेक्ट-चेकिंग पर ध्यान देना चाहिए।

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Iram Fatima
Iram Fatima
मेरा नाम इरम फातिमा है। मैं मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली हूं और मैंने पत्रकारिता करियर दो साल पहले एक अखबार के साथ शुरू किया था और वर्तमान में पिछले कुछ महीनों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हूं और ग्लोबल बाउंड्री में असिस्टेंट कंटेंट प्रोडूसर के रूप में काम कर रही हूं।

Lucknow Golaganj :सफा इंस्टीट्यूट द्वारा गोलागंज में “अल्पसंख्यक मुद्दों पर समाचार पोर्टलों की भूमिका” पर परिचर्चागोलागंज,24 अगस्त 2025: सफा इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया लिटरेसी एंड जर्नलिज्म ने अंजुमन फलाह दारीन, गोलागंज के हॉल में “अल्पसंख्यक मुद्दों के प्रतिनिधित्व में समाचार पोर्टलों की भूमिका: अवसर और चुनौतियाँ” विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों, यूट्यूबर्स और समाज के प्रति जागरूक युवाओं ने हिस्सा लिया।                                             
मुख्य वक्ता और उनके विचार:  कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मौलाना जहांगीर आलम कासमी (अध्यक्ष, अंजुमन फलाह दारीन, लखनऊ) ने कहा कि इस तरह के आयोजन बहुत जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में समाचार पोर्टल बनाना आसान हो गया है। खासकर अल्पसंख्यकों और मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को उठाने के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म की जरूरत है। उन्होंने युवाओं से पत्रकारिता में आगे आने और उनकी हौसला-अफजाई करने की बात कही।सफा इंस्टीट्यूट के संस्थापक और निदेशक मुफ्ती मुनव्वर सुल्तान नदवी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के पास मजबूत मीडिया हाउस की कमी है। कुछ युवाओं ने व्यक्तिगत स्तर पर अच्छा काम किया है, जिनकी सराहना होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि डिजिटल मीडिया ने हर व्यक्ति को पत्रकार और मीडिया हाउस का मालिक बना दिया है। संस्थान का उद्देश्य युवाओं को पत्रकारिता की ट्ररनिंग देना और स्कूल-कॉलेज के छात्रों में मीडिया के प्रति जागरूकता पैदा करना है।                                                                                                            पत्रकारों के विचार:कार्यक्रम समन्वयक और पत्रकार सलीम आजाद (एडिटर, ग्लोबल बाउंड्री) ने समाचार पोर्टल शुरू करने की जरूरत और तरीके पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि कम बजट में भी पोर्टल बनाया जा सकता है और प्रशिक्षित लोग इसे बेहतर तरीके से चला सकते हैं। यह समुदाय के मुद्दों को सामने लाने का अच्छा माध्यम है।राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार गुफरान नसीम ने कहा कि पत्रकारिता जितनी जरूरी है, उतनी ही संवेदनशील भी है। बिना सबूत के कोई बात नहीं कहनी चाहिए। सोशल मीडिया पर मिलने वाली खबरों की जांच जरूरी है और फेक्ट-चेकिंग पर ध्यान देना चाहिए।ईटीवी भारत के वरिष्ठ पत्रकार खुर्शीद अहमद मसबाही ने बताया कि आज मुख्यधारा के पत्रकार भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से खबरें ले रहे हैं। उन्होंने युवाओं को पत्रकारिता में आने के लिए बुनियादी प्रशिक्षण और पत्रकारिता के नैतिक नियमों का पालन करने की सलाह दी।मौलाना मुस्तफा नदवी मदनी (निदेशक, दारुल कुरान शाहीन, लखनऊ) ने कहा कि पत्रकारिता सहित हर क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय को विशेष प्रयास करने चाहिए। इससे युवाओं की प्रतिभा सामने आएगी और समुदाय की जरूरतें पूरी होंगी।                                                                                           अन्य वक्ता और आयोजन:  परिचर्चा में प्रोफेसर इदरीस नदवी (लखनऊ विश्वविद्यालय), पत्रकार फरीदुल हसन, सऊदुल हसन, डॉ. मोहम्मद उमर, खालिकुज्जमां, मिजम्मिल और अन्य ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम की मेजबानी सलमान सिद्दीकी नदवी ने की, जमशेद कादरी नदवी ने नात पेश की, और मौलाना जहांगीर आलम कासमी की दुआ के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। इस अवसर पर मौलाना अजहर शरकी नदवी, फैजान खान, अहमद नग्रामी, फहीम सिद्दीकी नदवी, नौशाद खान नदवी, पत्रकार नदीम नदवी, और पत्रकार मोहम्मद नफीस सहित कई लोग मौजूद थे।

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  • मेरा नाम इरम फातिमा है। मैं मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली हूं और मैंने पत्रकारिता करियर दो साल पहले एक अखबार के साथ शुरू किया था और वर्तमान में पिछले कुछ महीनों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हूं और ग्लोबल बाउंड्री में असिस्टेंट कंटेंट प्रोडूसर के रूप में काम कर रही हूं।

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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  • सलीम आजाद बीते 9 वर्षों से मीडिया इंडस्ट्री में हैं। 2015 में न्यूज़ चैनल JK 24x7 से पत्रकारिता की शुरुआत की उसके बाद मुसिफ टीवी और फिर ETV भारत हैदराबाद में काम किया और बीते लग भाग 4 वर्षों से ग्लोबल बाउंड्री के डिजिटल प्लेटफार्म पर सक्रिय हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जनपद बलरामपुर के रहने वाले हैं लेकिन पढ़ाई-लिखाई लखनऊ में हुई है। राजनीति और इंटरनेशनल ख़बरों में विशेष रूप से रूचि रखते हैं।

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