Saturday, March 7, 2026
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीनी राज्य के समर्थन में ऐतिहासिक मतदान:

142 देश, जिनमें सऊदी अरब, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, जर्मनी, इटली और अन्य यूरोपीय व अरब देश शामिल हैं। फिलिस्तीनी उपराष्ट्रपति हुसैन अल-शेख ने इसे "फिलिस्तीनी अधिकारों का समर्थन और कब्जे को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम" बताया।

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Abida Sadaf
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आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

न्यूयॉर्क, 13 सितंबर 2025 – संयुक्त राष्ट्र महासभा ने कल (12 सितंबर) को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें “न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन” का समर्थन किया गया है। यह प्रस्ताव इजरायल और फिलिस्तीन के बीच दो-राष्ट्र समाधान को बढ़ावा देने और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए ठोस, समयबद्ध और अपरिवर्तनीय कदमों की घोषणा करता है। 193 सदस्य देशों वाली महासभा में 142 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि केवल 10 देशों ने इसका विरोध किया और 12 ने मतदान से दूरी बनाए रखी। यह मतदान गाजा में चल रहे युद्ध और मानवीय संकट के संदर्भ में वैश्विक समुदाय की एकजुट आवाज को दर्शाता है, जो फिलिस्तीनी लोगों की स्वतंत्रता और राज्य निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

मतदान का विवरण : प्रस्ताव का शीर्षक “न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन ऑन द पीसफुल सेटलमेंट ऑफ द क्वेश्चन ऑफ फिलिस्तीन एंड द इम्प्लीमेंटेशन ऑफ द टू-स्टेट सॉल्यूशन” था, जो जुलाई 2025 में फ्रांस और सऊदी अरब द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का परिणाम है। इस सम्मेलन का उद्देश्य गाजा में तत्काल युद्धविराम, सभी बंधकों की रिहाई और एक फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना था, जो इजरायल की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करे।

पक्ष में मत: 142 देश, जिनमें सऊदी अरब, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, जर्मनी, इटली और अन्य यूरोपीय व अरब देश शामिल हैं। फिलिस्तीनी उपराष्ट्रपति हुसैन अल-शेख ने इसे “फिलिस्तीनी अधिकारों का समर्थन और कब्जे को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम” बताया।

विपक्ष में मत: 10 देश, जिनमें इजरायल, अमेरिका, अर्जेंटीना, हंगरी, माइक्रोनेशिया, नौरू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, पैराग्वे और टोंगा शामिल हैं। इजरायली राजदूत डैनी डैनन ने इसे “सुर्खियां बटोरने का नाटक” करार दिया, जबकि अमेरिका ने कहा कि यह फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के बजाय हमास का समर्थन करता है।

मतदान से दूरी: 12 देश, जिनमें लातविया जैसे कुछ देश शामिल हैं, जिन्होंने फिलिस्तीनी राज्य की पूर्ण मान्यता को स्वीकार न करने का रुख अपनाया।

यह मतदान गाजा में चल रहे संघर्ष के बीच हुआ, जहां इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक दिन पहले कहा था कि “फिलिस्तीनी राज्य कभी नहीं बनेगा।” प्रस्ताव में हमास की भी निंदा की गई है, जिसमें 7 अक्टूबर 2023 के हमलों की भर्त्सना और बंधकों की रिहाई की मांग की गई है। यह प्रस्ताव हमास-मुक्त फिलिस्तीनी सरकार का समर्थन करता है, जहां फिलिस्तीनी प्राधिकरण वेस्ट बैंक और गाजा पर शासन करे।

 

पृष्ठभूमि और महत्व : फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता का सफर लंबा रहा है। 1988 में फिलिस्तीनी नेतृत्व ने खुद को एक राज्य घोषित किया था, और अब तक संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से लगभग 75% (लगभग 145) ने इसे मान्यता दी है। 2012 में महासभा ने फिलिस्तीन को “गैर-सदस्य पर्यवेक्षक राज्य” का दर्जा दिया, जबकि 2024 में सुरक्षा परिषद में अमेरिका के वीटो के कारण पूर्ण सदस्यता नहीं मिल सकी। मई 2024 में महासभा ने फिलिस्तीन को अतिरिक्त अधिकार दिए, जैसे कि सदस्यों के साथ बैठने और प्रस्ताव पेश करने का अधिकार, लेकिन मतदान का अधिकार नहीं दिया गया।

 

इस हालिया मतदान का महत्व यह है कि यह दो-राष्ट्र समाधान को पुनर्जनन देने की कोशिश है, जहां फिलिस्तीन 1967 की सीमाओं पर एक स्वतंत्र राज्य बने और इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित हो। प्रस्ताव में एक अस्थायी वैश्विक स्थिरता मिशन की भी सिफारिश की गई है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तहत फिलिस्तीनी लोगों की सुरक्षा और राज्य निर्माण में सहायता देगा।

आगे का रास्ता : यह मतदान 22 सितंबर 2025 को न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र की एक दिवसीय बैठक की नींव रखता है, जो सऊदी अरब और फ्रांस की संयुक्त अध्यक्षता में होगी। इस बैठक में फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम जैसे देश फिलिस्तीनी राज्य की औपचारिक मान्यता की घोषणा करने जा रहे हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वादा किया है कि यह मान्यता फिलिस्तीनी राज्य के निर्माण की दिशा में एक कदम होगी।

 

वैश्विक नेताओं का कहना है कि यह मतदान “इतिहास का अनिवार्य मार्ग” है, जो फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देता है। हालांकि, अमेरिका और इजरायल का कहना है कि राज्य की स्थापना केवल प्रत्यक्ष बातचीत से संभव है, न कि एकतरफा कदमों से।

 

यह प्रस्ताव फिलिस्तीनी संघर्ष को वैश्विक मंच पर मजबूती देता है और शांति की उम्मीद की किरण है।

 

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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