Saturday, March 7, 2026
No menu items!

लखनऊ में AI से फैली तेंदुए की अफवाह: पूरी कहानी और सबक:

आशियाना और आसपास के स्कूलों ने बच्चों की सुरक्षा के लिए छुट्टी घोषित कर दी। सड़कों पर सन्नाटा: रात में लोग सड़कों पर कम दिखे, और कुछ जगहों पर डर के कारण ट्रैफिक जाम भी हुआ।

Must Read
Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

Lucknow Uttar prdesh:लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी, हाल ही में एक अनोखी घटना के कारण सुर्खियों में रही। 25 सितंबर 2025 को शहर के पॉश इलाकों में तेंदुए के घूमने की खबर ने दहशत मचा दी। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर वायरल तस्वीरों ने लोगों को घरों में कैद कर दिया, स्कूल बंद हो गए, और वन विभाग व पुलिस अलर्ट मोड में आ गए। लेकिन सच्चाई चौंकाने वाली थी—यह सब एक किशोर नाम के लड़के की शरारत थी, जिसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर फर्जी तस्वीरें बनाई थीं। यह घटना न केवल रोचक है, बल्कि AI के गलत इस्तेमाल के खतरों को भी उजागर करती है।

 

कैसे शुरू हुई यह अफवाह? लखनऊ के आशियाना इलाके में रहने वाले एक किशोर, देवांश नाम के लड़का जो  (16-17 वर्ष) का है उसने ने AI टूल्स का उपयोग कर तेंदुए की ऐसी तस्वीरें बनाईं, जो बिल्कुल असली लग रही थीं। उसने इन्हें मजाक में अपने दोस्तों के व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया। लेकिन ये तस्वीरें तेजी से वायरल हो गईं और आशियाना से गोमती नगर, इंदिरा नगर, और सगनई जैसे इलाकों तक पहुंच गईं। लोगों ने इसे सच मान लिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। सोशल मीडिया पर #LeopardInLucknow ट्रेंड करने लगा, और लोग डर के मारे घरों से बाहर निकलने से कतराने लगे।

दहशत का असर :स्कूल बंद: आशियाना और आसपास के स्कूलों ने बच्चों की सुरक्षा के लिए छुट्टी घोषित कर दी।

सड़कों पर सन्नाटा: रात में लोग सड़कों पर कम दिखे, और कुछ जगहों पर डर के कारण ट्रैफिक जाम भी हुआ।

वन विभाग और पुलिस सक्रिय: वन विभाग ने तेंदुए की तलाश में ट्रैकिंग टीमें भेजीं, जबकि पुलिस ने पेट्रोलिंग बढ़ा दी। लेकिन कोई सबूत—जैसे पंजे के निशान या CCTV फुटेज—नहीं मिला।

पुलिस जांच से खुला राज: जब वन विभाग को कोई ठोस सबूत नहीं मिला, तो पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट्स की जांच शुरू की। डीसीपी सेंट्रल आशीष श्रीवास्तव की अगुआई में जांच से पता चला कि तस्वीरें एक ही सोर्स से आई थीं। आखिरकार, देवांश को हिरासत में लिया गया। उसने कबूल किया कि उसने AI ऐप (जैसे Midjourney या अन्य इमेज-जनरेशन टूल्स) से तस्वीरें बनाई थीं। उसका इरादा सिर्फ दोस्तों को डराना था, लेकिन मामला अनजाने में शहर-व्यापी दहशत में बदल गया।

कानूनी कार्रवाई और सबक: देवांश की उम्र कम होने के कारण उसे चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। उसके माता-पिता को काउंसलिंग दी गई। पुलिस ने IPC धारा 505 (पब्लिक मिसचीफ) के तहत केस दर्ज किया, लेकिन इसे मामूली शरारत मानकर कार्रवाई सीमित रखी। डीसीपी आशीष श्रीवास्तव ने कहा, “यह AI का गलत इस्तेमाल है। लोग बिना सत्यापन के ऐसी खबरें न फैलाएं।

AI का खतरा और जागरूकता: यह घटना दिखाती है कि AI टूल्स कितनी आसानी से फर्जी कंटेंट बना सकते हैं। आज मुफ्त उपलब्ध AI ऐप्स से कोई भी रीयल लगने वाली तस्वीरें बना सकता है। यह सिर्फ मजाक तक सीमित नहीं; डीपफेक और फर्जी खबरों से बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। हाल ही में आगरा में AI से फर्जी QR कोड बनाकर 500 करोड़ का फ्रॉड हुआ था।

लोगों के लिए सलाह सत्यापन करें: वायरल तस्वीरें शेयर करने से पहले रिवर्स इमेज सर्च (जैसे Google Lens) यूज करें।

 आधिकारिक खबरों पर भरोसा: पुलिस या वन विभाग की आधिकारिक घोषणाओं को ही मानें।

 AI का जिम्मेदारी से उपयोग: बच्चों और युवाओं को AI टूल्स के खतरों के बारे में शिक्षित करें।

निष्कर्ष: लखनऊ की यह घटना एक मजाक से शुरू हुई, लेकिन इसने AI के दुरुपयोग की गंभीरता को सामने ला दिया। यह हमें सिखाता है कि टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल जरूरी है। लखनऊ पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सतर्क रहें।

Author

  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

    View all posts

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest News

गलगोटिया यूनिवर्सिटी इन दिनों चर्चा में क्यों है?

Noida: ग्रेटर नोएडा में स्थित  गलगोटिया यूनिवर्सिटी इन दिनों चर्चा में है। लोग इसे "गलघोटिया" कहकर ट्रोल कर रहे हैं।...

More Articles Like This