Saturday, March 7, 2026
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मुसलमानों के हक़ में पहली बार खुल कर गरजे मौलाना महमूद मदनी

मौलाना ने कहा कि हमें निष्क्रिय नहीं रहना चाहिए। हमें सक्रिय होकर अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है और हमें उसी संविधान के दायरे में रहकर अपने हक के लिए लड़ना चाहिए।

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

Bhopal: मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बैठक में अपने भाषण में कहा कि आज देश में मुसलमानों को बहुत परेशानियाँ हो रही हैं। बुलडोजर से घर तोड़े जा रहे हैं, भीड़ हिंसा हो रही है, वक्फ की जमीन पर कब्जा हो रहा है और मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इन सब से मुसलमानों को असुरक्षा का एहसास हो रहा है।

 

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को भी संविधान की रक्षा करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट को तभी सुप्रीम कहा जा सकता है जब वह संविधान की रक्षा करे।जिहाद शब्द के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि जिहाद का मतलब अन्याय के खिलाफ लड़ना है। कुछ लोग लव जिहाद, लैंड जिहाद जैसे शब्दों का गलत इस्तेमाल करके मुसलमानों को बदनाम करते हैं। लेकिन जिहाद का असली मतलब है अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना।

मौलाना मदनी ने कहा कि जो कौम डर जाती है, वह हर बात मान लेती है। लेकिन जो कौम जिंदा होती है, वह अपनी पहचान और हक के लिए लड़ती है।उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे एकजुट रहें। समाज में कुछ लोग उनका साथ देते हैं, कुछ उनके खिलाफ होते हैं और बहुत से लोग चुप रहते हैं। हमें उन लोगों को अपनी समस्याएँ समझानी चाहिए और उन्हें अपने साथ जोड़ना चाहिए।मौलाना ने कहा कि हमें निष्क्रिय नहीं रहना चाहिए। हमें सक्रिय होकर अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है और हमें उसी संविधान के दायरे में रहकर अपने हक के लिए लड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम मुर्दा कौम नहीं हैं। हम जिंदा कौम हैं और हमें एकजुट होकर अन्याय के खिलाफ लड़ना चाहिए।यह भाषण बहुत ही सरल और स्पष्ट था। मौलाना ने मुसलमानों को एकजुट रहने और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमें शांति और कानून के दायरे में रहते हुए अन्याय के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।यह भाषण मुसलमानों के लिए एक मार्गदर्शन की तरह था। इसमें यह बताया गया कि कठिन परिस्थितियों में भी एकजुट रहकर और अपने हक के लिए लड़कर ही सम्मान और सुरक्षा हासिल की जा सकती है।

 

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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