IRAN :TEHRAN:तेहरान, 10 जनवरी 2026: ईरान इन दिनों बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की चपेट में है। पिछले 10 दिनों से ज्यादा समय से पूरे देश में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ये प्रदर्शन आर्थिक मुश्किलों, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन अब ये सरकार विरोधी आंदोलन में बदल चुके हैं। सरकार ने इंटरनेट पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है, ताकि लोग एक-दूसरे से संपर्क न कर सकें और दुनिया को सच्चाई न पता चले। लेकिन फिर भी सोशल मीडिया और कुछ वीडियो से खबरें बाहर आ रही हैं।

प्रदर्शनों की शुरुआत और वजह:
ये विरोध 1 जनवरी 2026 के आसपास शुरू हुए, जब ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई। अमेरिकी प्रतिबंधों, तेल की गिरती कीमतों और कोरोना महामारी के बाद के प्रभाव से महंगाई आसमान छू रही है। ब्रेड, ईंधन और दवाइयों की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। लोग सरकार से नाराज हैं क्योंकि वो इन समस्याओं का हल नहीं निकाल पा रही। शुरुआत में छोटे-छोटे शहरों से विरोध शुरू हुआ, लेकिन जल्दी ही ये तेहरान, इस्फहान, मशहद जैसे बड़े शहरों में फैल गया। अब ये पूरे देश के 31 प्रांतों में पहुंच चुका है।

प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई और राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। वे “तानाशाही मुर्दाबाद” और “स्वतंत्रता चाहिए” जैसे नारे दे रहे हैं। कुछ जगहों पर लोग सरकारी इमारतों पर हमला कर रहे हैं, जबकि सुरक्षा बलों ने गोलीबारी और गिरफ्तारियां शुरू कर दी हैं। सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 2,500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, लेकिन असली संख्या इससे ज्यादा हो सकती है क्योंकि इंटरनेट बंद है।

इंटरनेट ब्लैकआउट: सरकार की रणनीति :
सरकार ने 8 जनवरी से पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया है। ये ब्लैकआउट अब 36 घंटों से ज्यादा हो चुका है। इसका मकसद प्रदर्शनकारियों को रोकना है, क्योंकि सोशल मीडिया से वे एक-दूसरे को कॉल कर रहे थे। लेकिन कुछ लोग स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट इंटरनेट से वीडियो शेयर कर रहे हैं। दुनिया भर में #DigitalBlackoutIran और #IranRevolution2026 जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग ईरान के लोगों की मदद के लिए आवाज उठा रहे हैं।
सुप्रीम लीडर खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को “उपद्रवी” और “तोड़फोड़ करने वाले” कहा है। उन्होंने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। सुरक्षा बलों ने रात में प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश की, लेकिन लोग फिर भी सड़कों पर हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया :
दुनिया भर से ईरान पर नजर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर हिंसा नहीं रुकी तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। उन्होंने ईरान के नेताओं को “चेतावनी” दी है। ईरान के पूर्व शाही परिवार के वारिस रेजा पहलवी ने लोगों से शहरों पर कब्जा करने की अपील की है। ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य देशों ने ईरान से इंटरनेट बहाल करने और हिंसा रोकने को कहा है।

कुछ रिपोर्ट्स में ईरान द्वारा मोसाद एजेंट्स को पकड़ने की खबरें भी हैं, लेकिन ये प्रदर्शनों से अलग लगती हैं। ईरान की सरकार इसे विदेशी साजिश बता रही है, लेकिन प्रदर्शनकारी कहते हैं कि ये उनके अपने अधिकारों की लड़ाई है।
आगे क्या होगा?
ये प्रदर्शन 2019 और 2022 के विरोधों से बड़े लग रहे हैं। तब महिलाओं के अधिकारों पर फोकस था, लेकिन अब आर्थिक संकट मुख्य मुद्दा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर इंटरनेट लंबे समय बंद रहा तो जानकारी कम आएगी, लेकिन आंदोलन रुकने वाला नहीं है। ईरान की 8 करोड़ आबादी में से करोड़ों लोग सड़कों पर हैं। छोटे गांवों तक विरोध पहुंच चुका है।

ईरान के लोग स्वतंत्रता और बेहतर जीवन की मांग कर रहे हैं।


