वाशिंगटन वेनेजुएला की अपोज़ीशन : मारिया कोरिना माचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। यह पुरस्कार उन्हें वेनेजुएला में लोकतंत्र के लिए लंबी लड़ाई और निकोलस मादुरो की तानाशाही के खिलाफ संघर्ष के लिए दिया गया था। लेकिन 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने मादुरो को गिरफ्तार कर लिया और वेनेजुएला में नई स्थिति बन गई।

ट्रंप ने माचाडो को वेनेजुएला की नई लीडर बनाने की बजाय दूसरे पक्ष (डेल्सी रोड्रिगेज) से बात की। ऐसे में माचाडो ने ट्रंप को खुश करने और उनकी मदद मांगने के लिए अपना नोबेल मेडल उन्हें भेंट कर दिया। मेडल पर लिखा था: “राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप को, शांति को मजबूती से बढ़ावा देने के लिए असाधारण नेतृत्व के लिए धन्यवाद। यह वेनेजुएला के लोगों की ओर से व्यक्तिगत आभार का प्रतीक है।

ट्रंप ने इसे स्वीकार किया और सोशल मीडिया पर लिखा: “मारिया ने मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया, जो मेरे काम के लिए है। यह आपसी सम्मान का बहुत खूबसूरत तरीका है। धन्यवाद मारिया!

नोबेल कमिटी ने क्या कहा?
नोबेल कमिटी ने साफ किया कि मेडल तो किसी को दिया जा सकता है, लेकिन पुरस्कार का असली दर्जा (लॉरिएट टाइटल) माचाडो के नाम ही रहेगा। यह ट्रांसफर नहीं हो सकता। कुछ नॉर्वेजियन नेताओं ने इसे “बेतुका” कहा और ट्रंप पर आलोचना की कि वे दूसरों के काम का क्रेडिट ले रहे हैं।

यह कदम क्यों उठाया?
माचाडो ने कहा कि यह ट्रंप की वेनेजुएला की आजादी के लिए “खास प्रतिबद्धता” का सम्मान है। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रंप का दिल जीतने और अमेरिकी समर्थन वापस पाने की कोशिश थी, क्योंकि ट्रंप ने उन्हें साइडलाइन कर दिया था। मुलाकात के बाद माचाडो ने कहा कि वह “सही समय पर” वेनेजुएला की राष्ट्रपति बनेंगी – देश की पहली महिला राष्ट्रपति।

ट्रंप ने उन्हें कोई बड़ा वादा नहीं किया, बस एक गिफ्ट बैग देकर विदा किया।


