Saturday, March 7, 2026
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कैलाश समुदाय की अनोखी परंपराएं जानकर हो जाएंगे हैरान

मृत्यु के समय शोक मनाने के बजाय, वह इसे ख़ुशी का मौका मनाते हैं. उनके लिए यह अवसर होता है जिसमें वह नाच गाकर और शराब पीकर दिवंगत आत्मा का स्वागत करते हैं

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के त्रिचाल ज़िले में बसी कैलाश समुदाय अपनी अद्वितीय संस्कृति और परंपराओं के लिए जानी जाती है. यह समुदाय पकिस्तान के सबसे कम संख्या वाले अल्पसंख्यकों में आती है, जिनकी आबादी लगभग 4 हज़ार है और यह एक दूसरे के साथ ग्रुप में रहते हैं. इस समुदाय की रीति रिवाज और जीवनशैली पाकिस्तान की मुख्यधारा से बिलकुल अलग हैं.

कैलाश की समुदाय की कई परंपराएं उनकी अद्वितीयता को दर्शाती हैं. जैसे कि, मृत्यु के समय शोक मनाने के बजाय, वह इसे ख़ुशी का मौका मनाते हैं. उनके लिए यह अवसर होता है जिसमें वह नाच गाकर और शराब पीकर दिवंगत आत्मा का स्वागत करते हैं. उनका मानना है कि व्यक्ति अपनी ज़िंदगी पूरी करके ऊपर वाले के पास लौटता है. उनकी यह सोच उन्हें अन्य समुदायों से अलग बनाती है.

कैलाश समुदाय की लड़कियों को अपने जीवनसाथी का चुनाव करने का पूरा अधिकार होता है. इस समाज में शादी के प्रति एक अलग दृष्टिकोण है. शादी को लेकर खुलापन यह दर्शाता है कि इस समुदाय में व्यक्तिगत पसंद को प्राथमिकता दी जाती है. इनका एक प्रमुख त्यौहार है चेमॉस, इस दौरान लड़कियाँ अपने पसंद के लड़के के साथ जा सकती हैं. यह प्रथा विवाह के निर्णय को एक उत्सव की तरह मनाने का अवसर प्रदान करती है.

कैलाशी लड़कियाँ उस लड़के के घर कितने दिन रह सकती हैं, यह पूरी तरह से उनकी इच्छा पर निर्भर करता है. यदि लड़की उस लड़के के साथ कुछ समय बिताने के बाद अपनी इच्छा व्यक्त करती है, तो इसे शादी का संकेत माना जाता है. इसके बाद दोनों की शादी की प्रक्रिया शुरू होती है, जो सामाजिक स्वीकृति के साथ सम्पन्न होती है. और अगर उन्हें कोई गैर मर्द पसंद आ जाए, तो वह अपनी शादी को तोड़ने में हिचकिचाती नहीं हैं. यह इस समाज की लचीली मानसिकता को दर्शाता है.

यहाँ घर की आर्थिक ज़िम्मेदारी ज़्यादातर महिलाओं पर होती है. वह भेड़ बकरियों को चराने के लिए पहाड़ों पर जाती हैं और घर पर पर्स तथा रंगीन मालाएँ बनाती हैं. इन मालाओं को बेचने का काम पुरुष करते हैं. यह समाज महिलाओं की मेहनत और कड़ी कार्यशैली की सराहना करता है. यहां की महिलाएं सजने संवरने में ख़ास रूचि रखती है, और वह सर पर विशेष किस्म की टोपी और गले में रंगीन पत्थरों की मालाएँ पहनती हैं.

कैलाश समुदाय की संस्कृति और परंपराएं हिंदू परंपराओं से मिलती जुलती हैं. यह लोग अनेक देवताओं को मानते हैं, यानी वह एक से ज़्यादा देवी देवताओं की पूजा करते हैं. इस समुदाय में बलि देने की परंपरा भी है, जो उनके धार्मिक विश्वासों का हिस्सा है. यह समुदाय न केवल अपनी पहचान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समर्द्ध सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक भी है.

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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