Saturday, March 7, 2026
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मथुरा शाही ईद गाह विवादित ढांचा लिखने से अदालत ने इंकार किया.

कोर्ट ने कहा कि मौजूदा तथ्यों और याचिका के आधार पर शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित नहीं किया जा सकता।

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Abida Sadaf
Abida Sadafhttp://globalboundary.in
आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

Mathura: मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 4 जुलाई 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने हिंदू पक्ष की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें शाही ईदगाह मस्जिद को “विवादित ढांचा” घोषित करने की मांग की गई थी।अगली सुनवाई 2 अगस्त को होगी यह फैसला जस्टिस राम मनोहर मिश्रा कि याक रुकनी बेंच ने दिया है और स्वामित का अधिकार कि सुनवाई 18 जुलाई को होगी  यह याचिका हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने 5 मार्च 2025 को दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मस्जिद का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर बने एक प्राचीन मंदिर को तोड़कर किया गया था।

  • हिंदू पक्ष का तर्क:
    • महेंद्र प्रताप सिंह ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और किताबों, जैसे मासिर-ए-आलम गिरी और मथुरा के पूर्व कलेक्टर एफएस ग्राउस की रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा था कि मस्जिद की जगह पहले मंदिर था।
    • उन्होंने दावा किया कि मस्जिद के पक्ष में कोई वैध दस्तावेज, जैसे खसरा-खतौनी, नगर निगम रिकॉर्ड , या टैक्स भुगतान का प्रमाण नहीं है।
    • अतीत में मस्जिद के पर्शासनिक पर् बिजली  चोरी कि रिपोर्ट लिखवाई
    • हिंदू पक्ष ने यह भी कहा कि मस्जिद की दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं के प्रतीक मौजूद हैं, जो इसे मंदिर होने का साक्ष्य देते हैं।
    • इन तमाम कारणों पर एडोकेट महिंद्र परताप सिंघ ने मस्जिद कि जगह मुतनाज़ा ढांचा लिखने कि मांग किया  था
    • याचिका में अयोध्या के बाबरी मस्जिद प्रकरण की तर्ज पर शाही ईदगाह को विवादित ढांचा घोषित करने की मांग की गई थी।
  • मुस्लिम पक्ष की आपत्ति:
    • मुस्लिम पक्ष ने दलील दी कि शाही ईदगाह 400 साल से अस्तित्व में है और इसे विवादित ढांचा घोषित करना ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ है।
    • उन्होंने हिंदू पक्ष की मांग को मनगढ़ंत और आधारहीन बताया।

  • कोर्ट का फैसला:
    • जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की सिंगल बेंच ने याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था और 4 जुलाई 2025 को इसे खारिज कर दिया।
    • कोर्ट ने कहा कि मौजूदा तथ्यों और याचिका के आधार पर शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित नहीं किया जा सकता।
    • कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक किताबों या संदर्भों के आधार पर किसी धार्मिक स्थल को विवादित घोषित करना पर्याप्त नहीं है।
  • हिंदू पक्ष की प्रतिक्रिया:
    • इस फैसले को हिंदू पक्ष के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है।
    • हिंदू पक्ष के वकीलों ने संकेत दिया है कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं।
  • विवाद का पृष्ठभूमि:
    • यह विवाद मथुरा के कटरा केशव देव क्षेत्र की 13.37 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद दोनों स्थित हैं।
    • हिंदू पक्ष का दावा है कि 1670 में मुगल सम्राट औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई थी, जबकि मुस्लिम पक्ष इससे इनकार करता है।
    • इस मामले में कुल 18 मुकदमे लंबित हैं, जिनमें मस्जिद को हटाकर जमीन पर मंदिर निर्माण की मांग शामिल है।

निष्कर्ष:इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले से शाही ईदगाह मस्जिद का मौजूदा स्टेटस बरकरार रहेगा। कोर्ट ने साफ किया कि याचिका में पर्याप्त आधार नहीं थे और इसे सुनवाई योग्य नहीं माना गया। यह मामला धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से संवेदनशील है, और हिंदू पक्ष के सुप्रीम कोर्ट में जाने की संभावना से इस विवाद पर चर्चा और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है।

अधिक जानकारी के लिए, आप नवभारत टाइम्स, आज तक, या टाइम्स नाउ जैसे समाचार स्रोतों की वेबसाइट्स पर जा सकते हैं।

 

 

 

 

 

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  • आबिदा सदफ बीते 4 वर्षों से मीडिया से जुड़ी रही हैं। इन्किलाब अखबार से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरूआत की थी। आबिदा सदफ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद की रहने वाली हैं.

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